वेस्ट एशिया में छिड़ा युद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है जहां से वापसी लगभग नामुमकिन है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ऑपरेशन एपिक फ्यूरी अपने तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और पेंटागन के रुख से साफ है कि अब हवाई हमलों से आगे बढ़कर अमेरिका ईरान की सरजमीं पर अपने सैनिक उतारने की तैयारी कर रहा है।
7,000 सैन्य ठिकानों का खात्मा रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के 7,000 से अधिक सैन्य ठिकानों को मलबे में तब्दील कर दिया है। अमेरिका का कहना है कि उसने ईरान की वायु रक्षा प्रणाली और ड्रोन प्रोडक्शन लाइन्स को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। लेकिन पेंटागन के बंद कमरों में अब एक बड़े जमीनी मिशन का ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है।
खार्ग आइलैंड पर कब्जे की बिसात अमेरिकी सेना की नजर अब खार्ग आइलैंड पर है, जहां से ईरान अपना 90% तेल निर्यात करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे तबाह करने के बजाय उस पर कब्जा करना अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से अधिक फायदेमंद होगा। अगर मरीन कॉर्प्स यहाँ नियंत्रण पा लेती है, तो ईरान की पूरी इकोनॉमी अमेरिका के हाथों में आ जाएगी। हालांकि, ईरान के पास मौजूद मिसाइलें इसे किसी सुसाइड मिशन से कम नहीं बनाती हैं।
परमाणु ठिकानों को कब्जे में लेने की चुनौती अमेरिका का सबसे बड़ा लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना है। सैन्य अधिकारी नतांज और फोर्डो जैसे परमाणु केंद्रों पर कब्जे के लिए एलीट डेल्टा फोर्स और नेवी सील्स के इस्तेमाल पर विचार कर रहे हैं। इन ठिकानों को पहाड़ों के भीतर कंक्रीट की मोटी परतों के नीचे बनाया गया है, जिन्हें भेदने के लिए अमेरिका 5,000 पाउंड के पेनेट्रेटर वेपन्स का उपयोग कर रहा है।
ईरान का भूगोल: ट्रंप के लिए सबसे बड़ी बाधा सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि ईरान, इराक या अफगानिस्तान की तरह आसान नहीं है। ईरान के पास 6 लाख की सक्रिय सेना और 1.9 लाख बेहद प्रशिक्षित रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) हैं। देश का ऊबड़-खाबड़ भूगोल और पहाड़ों में छिपे बंकर अमेरिकी सेना के लिए घातक साबित हो सकते हैं। अगर अमेरिकी सैनिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में उतरते हैं, तो उन्हें ड्रोन के झुंड और समुद्री माइन्स का सामना करना पड़ेगा।
क्या यह फॉरएवर वॉर की आहट है? ट्रंप प्रशासन भले ही इसे निर्णायक युद्ध बता रहा हो, लेकिन अमेरिकी जनता में इसे लेकर भारी विरोध है। एक सर्वे के मुताबिक, 74% अमेरिकी नागरिक ईरान में जमीनी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ हैं। इराक और अफगानिस्तान के कड़वे अनुभवों के बाद, अमेरिका के लिए ईरान में लंबे समय तक टिकना एक भीषण मानवीय और आर्थिक आपदा को न्योता देने जैसा हो सकता है।
फिलहाल, ओमान की खाड़ी में अमेरिकी हलचल चरम पर है। क्या ट्रंप वाकई ईरान के भीतर सीधी जंग छेड़कर एक नई मुश्किल को गले लगाने जा रहे हैं, या यह केवल ईरान को घुटनों पर लाने की एक मनोवैज्ञानिक चाल है? दुनिया अब इस महायुद्ध के अगले कदम पर टकटकी लगाए बैठी है।
*.@thejointstaff Chairman Gen. Dan Caine with an update on Operation Epic Fury:
— Rapid Response 47 (@RapidResponse47) March 19, 2026
The U.S. military dropped 5,000lb. penetrator weapons into underground storage facilities storing coastal defense cruise missiles. We continue to hunt and kill mine storage facilities and naval… pic.twitter.com/xYkzj8pCw3
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