बंगाल की सियासत में डिजिटल दंगल : BJP और TMC के सोशल मीडिया वॉर से गरमाया चुनावी माहौल
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पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में अब सोशल मीडिया मुख्य युद्धभूमि बन चुका है। 2026 विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच चल रही जुबानी जंग ने राज्य के राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। दोनों दलों के आधिकारिक हैंडल से जारी तीखे बयानों ने साफ कर दिया है कि अगले कुछ महीने बंगाल की सियासत में भारी उथल-पुथल वाले होंगे।

भ्रष्टाचार और दमन के आरोपों पर BJP की घेराबंदी BJP ने अपने आक्रामक तेवर दिखाते हुए ममता बनर्जी सरकार को दमनकारी शासन करार दिया है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया कि राज्य में नौकरी और राशन चोरी करने वालों को टिकट दिए जा रहे हैं। BJP ने हिंदुओं और आदिवासियों के अपमान का मुद्दा उठाते हुए हुंकार भरी है कि 46 दिनों के भीतर राज्य से इस शासन को लोकतांत्रिक तरीके से उखाड़ फेंका जाएगा।

सांप्रदायिक तनाव पर BJP का तीखा कटाक्ष धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने के आरोपों को लेकर भी BJP काफी मुखर है। पार्टी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हिंदुओं को धमकाने का आरोप लगाया और उनकी तुलना अकबरुद्दीन ओवैसी से कर दी। BJP का कहना है कि वे सांप्रदायिक सौहार्द के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेंगे और बंगाल में अब सांप्रदायिकता का अंत करीब है।

TMC का पलटवार: अपराधी बनाम महिला सुरक्षा तृणमूल कांग्रेस ने इन हमलों का जवाब देते हुए BJP के टिकट वितरण पर सवाल उठाए हैं। TMC ने कटाक्ष किया कि पार्टी ऐसे टिकट बांट रही है जैसे आपराधिक रिकॉर्ड ही चुनाव लड़ने की पहली योग्यता हो। पार्टी ने साफ किया है कि 2026 में बंगाल की जनता इसका जोरदार जवाब देगी।

इसके अलावा, TMC ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर BJP को बैकफुट पर धकेलने की कोशिश की है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की घटनाओं का जिक्र करते हुए बेटी बचाओ के नारों को दिखावा बताया। एक 4 साल की बच्ची के साथ हुई दरिंदगी का उदाहरण देते हुए TMC ने BJP शासित राज्यों की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

डिजिटल जंग और भविष्य की राजनीति राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर यह डिजिटल वॉर आने वाले दिनों में और तेज होगी। रैलियों और सभाओं से परे, अब डिजिटल प्लेटफॉर्म हर पार्टी की रणनीति का सबसे अहम हिस्सा बन गए हैं।

सवाल यह है कि आरोप-प्रत्यारोप का यह शोर क्या मतदाताओं के फैसले को प्रभावित करेगा? फिलहाल, बंगाल की जनता इस डिजिटल शोर के बीच किसे सत्ता की चाबी सौंपती है, यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन इतना तय है कि 2026 की जंग में कोई भी दल पीछे हटने के मूड में नहीं है।

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