मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में सरकारी लापरवाही का एक ऐसा नमूना सामने आया है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीम ने करोड़ों रुपये की लागत से सड़क तो बना दी, लेकिन सड़क के बीच में खड़े एक चालू हैंडपंप को हटाना मुनासिब नहीं समझा।
हैरानी भरा कारनामा यह मामला विंध्याचल थाना क्षेत्र के कंतित इनारा का है। दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संभावित दौरे के चलते अधिकारियों ने आनन-फानन में काम पूरा करने के चक्कर में बुनियादी सुरक्षा मानकों को ताक पर रख दिया। सड़क तो बन गई, लेकिन बीच सड़क पर खड़ा हैंडपंप राहगीरों और वाहनों के लिए किसी बड़े हादसे का निमंत्रण बन गया है।
वायरल वीडियो ने खोली पोल सोशल मीडिया पर सड़क का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि नई बनी सड़क के ठीक बीच में हैंडपंप मजबूती से खड़ा है। सड़क से गुजरने वाले लोग हैरान हैं कि आखिर इंजीनियरों ने निर्माण के दौरान इसे हटाने की जहमत क्यों नहीं उठाई।
अधिकारियों का पल्ला झाड़ने वाला जवाब मामले की किरकिरी होने के बाद PWD के सहायक अभियंता ने अपना बचाव करते हुए कहा कि हैंडपंप को शिफ्ट करने की जिम्मेदारी नगर पालिका की थी, जो समय पर पूरी नहीं हो सकी। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या विभाग को हैंडपंप हटने का इंतजार करने के बजाय सड़क निर्माण को बेहतर ढंग से नियोजित नहीं करना चाहिए था?
प्रशासन की तैयारियों पर सवाल गौरतलब है कि विंध्याचल में 19 अप्रैल से नवरात्रि मेला शुरू होने वाला है, जिसे लेकर प्रशासन करोड़ों रुपये खर्च कर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का दावा कर रहा है। ऐसे में इस तरह की अंधेरगर्दी ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
कार्रवाई शुरू सोशल मीडिया पर मामला तूल पकड़ने और चौतरफा आलोचना के बाद विभाग अब हरकत में आया है। अधिकारियों ने आनन-फानन में मजदूरों को बुलाकर हैंडपंप को हटाने और उसे दूसरी जगह शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बहरहाल, यह मामला सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर एक बदनुमा दाग की तरह बना हुआ है।
*मौत का सामान.. बीच सड़क!
— Narendra Pratap (@hindipatrakar) March 18, 2026
मिर्जापुर में एक सड़क का निर्माण हुआ. सरकार का करोड़ों रुपया खर्च हुआ. मगर जब सड़क बनाकर तैयार हुई तो बीचो-बीच एक हैंडपंप खड़ा रह गया.
यह हैंडपंप पहले से मौजूद था. सड़क की तरह यह भी सरकारी है. इसलिए इसकी स्थिति कागजों की मदद के बगैर बदली नहीं जा सकती.… pic.twitter.com/iMgeWNToaL
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