नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को एक विशेष पत्र लिखा है। इस पत्र ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। ओम बिड़ला ने सोशल मीडिया पर इस पत्र को साझा करते हुए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया है।
पीएम मोदी ने की स्पीकर की सराहना प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी चिट्ठी में सदन के संचालन के दौरान ओम बिड़ला के धैर्य, संयम और निष्पक्षता की जमकर तारीफ की। मोदी ने कहा कि यह सदन एक नई राजनीतिक संस्कृति का वाहक बना है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि अब भी कुछ लोग वंशवादी और सामंती मानसिकता के कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अपना नियंत्रण रखना चाहते हैं और नए नेतृत्व को स्वीकार करने से बचते हैं। उन्होंने संसद को चर्चा और विचार-विमर्श का सबसे पवित्र स्थान बताया।
ओम बिड़ला ने जताया आभार प्रधानमंत्री की चिट्ठी पर प्रतिक्रिया देते हुए ओम बिड़ला ने कहा कि मोदी जी का पत्र लोक सेवा के उन उच्चतम नैतिक मूल्यों को दर्शाता है, जिसे उन्होंने अपने मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक के सफर में जिया है। बिड़ला ने संसदीय परंपराओं में मोदी के अटूट विश्वास की भी सराहना की।
सांसदों के व्यवहार पर जताई नाराजगी स्पीकर ने सभी दलों के नेताओं को एक अलग पत्र लिखकर सदन के भीतर सांसदों के आचरण पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बैनर-पोस्टर दिखाना और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना संसद की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में कुछ सदस्यों का व्यवहार चिंता का विषय है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
आत्म-मंथन की जरूरत ओम बिड़ला ने सभी दलों के शीर्ष नेताओं से अपील की है कि वे अपने सदस्यों को अनुशासन और शिष्टाचार के पाठ पढ़ाएं। स्पीकर ने जोर देकर कहा कि देश की जनता संसद की हर गतिविधि को देख रही है। उन्होंने सामूहिक आत्म-मंथन का आह्वान करते हुए कहा कि संसदीय लोकतंत्र के प्रति विश्वास बनाए रखने के लिए गरिमापूर्ण व्यवहार अनिवार्य है।
बिड़ला ने विश्वास जताया कि सभी राजनीतिक दल मिलकर इस महान संस्था की गौरवशाली परंपराओं को बचाने में अपना पूर्ण सहयोग देंगे।
माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी,
— Om Birla (@ombirlakota) March 15, 2026
आपका पत्र प्राप्त हुआ। भारत के संसदीय लोकतंत्र के नियमों, प्रक्रियाओं और परंपराओं के प्रति आपका हमेशा अटूट विश्वास रहा है। आपका पत्र लोक सेवा के उन उच्चतम नैतिक मूल्यों को व्यक्त करता है, जिन्हें आपने अपने दीर्घ सार्वजनिक जीवन में जिया… pic.twitter.com/2eXTMULPhw
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