टोक्यो की चाय वाली: एंबेसी छोड़कर 42 साल से बेच रहीं चाय, PM मोदी से तीसरी बार मिलने को बेताब!
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के दो दिवसीय दौरे पर हैं. इस दौरे का मकसद भारत-जापान के बीच कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करना और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को बढ़ाना है.

दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर आधारित है.

प्रधानमंत्री मोदी जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा से मिलेंगे. इस मुलाकात में रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और आधुनिक तकनीकों में साझेदारी पर जोर रहेगा.

दुनिया अमेरिका के व्यापार युद्ध के दबाव में है, इसलिए इस दौरे में सामरिक और सुरक्षा सहयोग का महत्व बढ़ जाता है.

आर्थिक साझेदारी भी दौरे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. भारत और जापान निवेश बढ़ाने, डिजिटल नवाचार और हरित तकनीकों में सहयोग को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं.

जापान ने भारत के विकास में कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में मदद की है, जिनमें मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना मुख्य है.

दोनों नेता व्यापार के नए अवसरों, सप्लाई चेन को मजबूत करने और निवेश के अवसरों पर भी चर्चा करेंगे.

राजनीति और अर्थव्यवस्था के साथ-साथ इस दौरे में सांस्कृतिक सहयोग को भी महत्व दिया जा रहा है. भारत और जापान के बीच लंबे समय से बौद्ध धर्म और अकादमिक क्षेत्र में सांस्कृतिक आदान-प्रदान जारी है.

प्रधानमंत्री मोदी जापान में भारतीय समुदाय से भी मिलेंगे, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलेगी.

इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात एक विशेष महिला से होने वाली है. जापान में रहने वाली बेला च्रंदाणी, जिन्हें लोग टोक्यो की चाय वाली के नाम से जानते हैं, प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए उत्सुक हैं.

बेला 1977 में भारत से जापान आईं थीं. पहले वे भारतीय एंबेसी में काम करती थीं. बाद में उन्होंने चाय बेचने का व्यवसाय शुरू किया.

बेला पिछले 42 सालों से टोक्यो में चाय बेच रही हैं और वे स्थानीय और भारतीय समुदाय दोनों में लोकप्रिय हैं.

उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी से तीसरी बार मिलेंगी. उनके लिए प्रधानमंत्री मोदी से मिलना एक बड़ा सौभाग्य है. बेला चाहती हैं कि प्रधानमंत्री मोदी जापान में अक्सर आएं, क्योंकि भारत में उनसे मिलना मुश्किल है.

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत और जापान के बीच सुरक्षा, आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देगा. यह यात्रा क्षेत्र में शांति, समृद्धि और स्थिरता सुनिश्चित करने के भारत-जापान के साझा उद्देश्य को भी मजबूत करेगी.

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