हिंदू राष्ट्र, विरोध, इस्लाम और 15 अहम मुद्दे: भागवत के बयानों का सार
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने आरएसएस के 100 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित व्याख्यानमाला में महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी राय रखी।

भागवत ने स्पष्ट किया कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह पहले से ही है। यह एक सत्य है, जिसे मानने में लाभ है और न मानने में नुकसान। उन्होंने कहा कि हम मुसलमान, ईसाई हो सकते हैं, लेकिन हम भारतीय ही हैं।

अखंड भारत की अवधारणा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सभ्यतागत है। प्राचीन काल में शासकों को अनुमति की आवश्यकता होती थी, लेकिन जनता स्वतंत्र रूप से घूम सकती थी।

75 साल की उम्र में पद छोड़ने की बात पर भागवत ने कहा कि उन्होंने कभी ऐसा नहीं कहा। मोरोपंत पिंगले जी के वाकये का आशय किसी नेता के संन्यास लेने से नहीं था। वे जीवन में कभी भी संन्यास लेने के लिए तैयार हैं और जब तक संघ चाहेगा, काम करने के लिए तैयार हैं।

संघ-भाजपा संबंधों पर उन्होंने कहा कि संघ भाजपा के लिए कुछ भी तय नहीं करता, ना ही अध्यक्ष का चयन। सुझाव दिए जा सकते हैं, लेकिन निर्णय भाजपा को ही लेना होगा। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच कोई मतभेद नहीं है।

नेताओं के जेल जाने पर भागवत ने कहा कि नेतृत्व पारदर्शी और स्वच्छ होना चाहिए। कानून बनना चाहिए या नहीं, यह संसद तय करेगी।

संघ के विरोध पर उन्होंने कहा कि मन में हमेशा परिवर्तन संभव है, किसी का जल्दी हो जाता है, किसी को समय लगता है।

तीन बच्चे पैदा करने के विषय पर भागवत ने कहा कि दुनिया में जिनकी जन्मदर 3 से कम होती है, वे धीरे-धीरे लुप्त हो जाते हैं। किसी सभ्यता को जीवित रखने के लिए 3 तो रखना चाहिए।

भागवत ने कहा कि सभी भारतीयों को कम से कम तीन भाषाएं आनी चाहिए: मातृभाषा, राज्य की भाषा और देश के लिए एक संपर्क भाषा, जो विदेशी नहीं होनी चाहिए।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर उन्होंने कहा कि एआई भाषाएं सीख सकता है, लेकिन क्या यह भावनाओं को समझ सकता है? संघ भी एआई को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

काशी-मथुरा आंदोलन पर आरएसएस प्रमुख ने कहा कि राम मंदिर एकमात्र ऐसा आंदोलन रहा जिसका आरएसएस ने समर्थन किया है। वह किसी अन्य आंदोलन में शामिल नहीं होगा, लेकिन हमारे स्वयंसेवक इसमें शामिल हो सकते हैं।

भागवत ने कहा कि धर्म व्यक्तिगत पसंद का मामला है। इसमें किसी तरह का प्रलोभन या जोर-जबरदस्ती शामिल नहीं होनी चाहिए। हिंदू आत्मविश्वास की कमी के कारण असुरक्षित हैं। RSS किसी पर भी हमला करने में विश्वास नहीं रखता।

शहरों और सड़कों के नाम लोगों की भावनाओं के आधार पर रखे जाने चाहिए, मुस्लिम आक्रांताओं के नाम पर नहीं। देशभक्त मुसलमानों के नाम पर रखे जा सकते हैं।

आरक्षण के विषय पर भागवत ने कहा कि आरक्षण वगैरा विषय तभी समझ आते हैं, जब मन में संवेदन हो। आरएसएस संविधान के तहत आरक्षण नीतियों का पूरा समर्थन करता है।

जातिवाद पर उन्होंने कहा कि जाति व्यवस्था पुरानी हो चुकी है और इसे खत्म होना ही होगा।

घुसपैठियों पर भागवत ने कहा कि घुसपैठ को रोकना चाहिए। सरकार कुछ प्रयास कर रही है, धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है।

मनुस्मृति पर उन्होंने कहा कि स्मृतियां समय के अनुसार बदलती रहती हैं। हमारे धर्माचार्यों को नई स्मृति उत्पन्न करनी चाहिए।

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