अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को यमन में हूती विद्रोहियों पर हुए हवाई हमले का एक वीडियो जारी किया, जिसमें दर्जनों विद्रोही मारे गए. यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने हिंद महासागर के डिएगो गार्सिया द्वीप पर छह बी-2 स्टील्थ बॉम्बर विमान तैनात किए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईरान और हूतियों को रोकने की कोशिश है.
आसमान का भूत कहे जाने वाले ये अत्याधुनिक विमान ईरान के समुद्र तट से महज 2,400 मील की दूरी पर स्थित हैं. इस तैनाती से पहले से ही तनावग्रस्त मध्य पूर्व में और उत्तेजना बढ़ सकती है. सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस द्वीप के एयरबेस पर छह बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स मौजूद हैं, जो अमेरिकी स्टील्थ बॉम्बर बेड़े का 30% है. विशेषज्ञों का मानना है कि हैंगर में और भी विमान हो सकते हैं.
प्रत्येक बी-2 की कीमत 2 बिलियन डॉलर है. ये विमान रडार से बच सकते हैं और दुनिया के किसी भी लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम हैं. हवा में ही ईंधन भरने की क्षमता के कारण इनकी मारक क्षमता और बढ़ जाती है. अतीत में भी हूतियों को निशाना बनाने के लिए इन विमानों का इस्तेमाल किया गया है. बी-2 में पायलटों के लिए भोजन और शौचालय जैसी सुविधाएं भी हैं. युद्ध में आज तक कोई भी बी-2 विमान नष्ट नहीं हुआ है.
यह कदम अचानक नहीं उठाया गया है. इसे ट्रंप की ओर से एक आक्रामक हमले के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य लाल सागर में अमेरिकी जहाजों पर हमले करने वाले और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने वाले हूतियों पर दबाव डालना है. अमेरिका पिछले कई हफ्तों से यमन में हूतियों पर बमबारी कर रहा है.
ट्रंप ने हूती विद्रोहियों पर तब तक हमले जारी रखने की कसम खाई है जब तक कि वे लाल सागर में जहाजों पर हमले बंद नहीं कर देते. गाजा में इजरायल और हमास के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से हूतियों ने इस क्षेत्र में जहाजों को निशाना बनाया है.
ट्रंप ने कहा, अमेरिकी जहाजों पर गोलीबारी बंद करो और हम तुम पर गोलीबारी बंद कर देंगे। हमने तो अभी शुरुआत ही की है, हूतियों और ईरान में उनके समर्थकों को असली जख्म देना अभी बाकी है.
हालांकि, रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि डिएगो गार्सिया में छह बी-2 बमवर्षक विमानों की तैनाती का लक्ष्य सिर्फ हूतियों को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक व्यापक रणनीति है. इस तैनाती के माध्यम से ईरान को यह संदेश दिया जा रहा है कि वह ट्रंप प्रशासन के साथ अपने परमाणु समझौते पर फिर से बातचीत करे.
पिछले महीने ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई को पत्र लिखकर नए परमाणु समझौते पर पहुंचने के लिए दो महीने की समय सीमा दी थी, साथ ही चेतावनी भी दी थी कि ऐसा न करने पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.
ट्रंप ने पहले कहा था कि ईरान से निपटने के दो तरीके हैं: सैन्य कार्रवाई या समझौता. उन्होंने कहा कि वह समझौता करना पसंद करेंगे क्योंकि वह ईरान को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते. हालांकि, ईरान ने किसी भी सीधी बातचीत से इनकार किया है.
ईरान ने सैन्य परमाणु कार्यक्रम से इनकार किया है, लेकिन रिपोर्टों और विश्लेषणों से पता चलता है कि वह इस दिशा में आगे बढ़ चुका है. ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2015 के अमेरिका, ईरान और अन्य वैश्विक शक्तियों के बीच हुए परमाणु समझौते से खुद को अलग कर लिया था.
यदि ईरान बातचीत की मेज पर नहीं आता है, तो उसकी परमाणु और हथियार भंडारण सुविधाएं अमेरिका का संभावित लक्ष्य हो सकती हैं.
These Houthis gathered for instructions on an attack. Oops, there will be no attack by these Houthis!
— Donald J. Trump (@realDonaldTrump) April 4, 2025
They will never sink our ships again! pic.twitter.com/lEzfyDgWP5
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