डीपफेक एक खतरनाक तकनीक है जो सच और झूठ के बीच की रेखा को धुंधला कर रही है। ऐसे वीडियो और तस्वीरें तेजी से बढ़ रही हैं जो लोगों की छवि को खराब कर सकती हैं, समाज में नफरत फैला सकती हैं और गलत जानकारी को सच के रूप में पेश कर सकती हैं।
केंद्र सरकार ने इस खतरे को देखते हुए सख्त कदम उठाए हैं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को तुरंत कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को चेतावनी दी है कि वे डीपफेक और AI द्वारा उत्पन्न गलत जानकारी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अवैध या झूठी सामग्री को हटाने में देरी न करने की सलाह दी गई है।
यह कदम तेजी से बढ़ते डीपफेक के खतरे को देखते हुए उठाया गया है, जिससे आम जनता को गुमराह किया जा सकता है या किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ कई बार चर्चा की है। उन्हें याद दिलाया गया है कि 2021 के IT नियमों का पालन करना अनिवार्य है। इन नियमों का उद्देश्य भारत के नागरिकों के लिए एक सुरक्षित, जिम्मेदार और पारदर्शी साइबर स्पेस बनाना है।
राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा को बताया कि कंपनियों को उनकी ड्यू डिलिजेंस यानी सतर्कता जिम्मेदारी निभाने के लिए बार-बार कहा गया है, खासकर तब जब बात नई टेक्नोलॉजी जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि IT एक्ट में पहचान की चोरी, किसी की नकल करना, गोपनीयता का उल्लंघन और अश्लील कंटेंट शेयर करने जैसे साइबर अपराधों के लिए सजा का प्रावधान है। मंत्री ने कहा कि यह कानून सिर्फ यूजर जनरेटेड कंटेंट तक सीमित नहीं है बल्कि AI द्वारा बनाए गए कंटेंट पर भी लागू होता है।
सरकार उद्योग से जुड़ी कंपनियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है कि AI का उपयोग नैतिक रूप से हो और इसका दुरुपयोग न हो।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जैसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम आदि को अब किसी भी तरह की गलत या अवैध जानकारी पोस्ट करने की अनुमति नहीं है। यदि कोई यूजर या सरकार किसी कंटेंट की शिकायत करता है, तो उस पर जल्दी से कार्रवाई करना अनिवार्य है।
सरकार ने एक नई सुविधा शुरू की है, Grievance Appellate Committee (www.gac.gov.in)। यहां यूजर सोशल मीडिया कंपनियों के फैसलों के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं।
CERT-In, एक सरकारी एजेंसी, समय-समय पर लोगों को साइबर खतरों से बचने के लिए सलाह देती रहती है, खासकर AI और डीपफेक टेक्नोलॉजी के कारण झूठी खबरें और नकली वीडियो तेजी से फैल रहे हैं।
चुनाव या संवेदनशील मुद्दों के समय सरकार का यह कदम डिजिटल सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। अब सोशल मीडिया कंपनियों को जिम्मेदारी से काम करना होगा और गलत जानकारी को तुरंत हटाना होगा।
The Government of India, through the Ministry of Electronics & IT (MeitY), is actively addressing the growing threat of deepfakes and AI-generated misinformation by strengthening regulations and promoting cyber safety.
— DD News (@DDNewslive) April 4, 2025
The policies of Government of India are aimed at ensuring a… pic.twitter.com/J5HwV0UMVZ
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