बेबी, तुम मुझे लेने नहीं आए... : शहीद सिद्धार्थ की अंतिम विदाई पर मंगेतर सोनिया का ह्रदयविदारक क्रंदन
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रेवाड़ी, 5 अप्रैल 2025: हरियाणा के रेवाड़ी में शहीद लेफ़्टिनेंट सिद्धार्थ यादव की अंतिम विदाई का दृश्य ऐसा था कि हर आंख नम हो गई। गुजरात में जगुआर विमान दुर्घटना में शहीद हुए सिद्धार्थ को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

तिरंगे में लिपटे सिद्धार्थ का पार्थिव शरीर जैसे ही अंतिम संस्कार स्थल पर पहुंचा, वहां मौजूद लोग भावुक हो उठे। लेकिन सबसे हृदयविदारक दृश्य उनकी मंगेतर सोनिया का था, जिनकी सिसकियां और करुण पुकार सुनकर हर किसी की आंखें भर आईं।

सिद्धार्थ और सोनिया की सगाई 10 दिन पहले ही हुई थी, और उनकी शादी 2 नवंबर को तय थी।

तू बोला था मुझे लेने आएगा... अंतिम संस्कार के दौरान सोनिया का दर्द छलक पड़ा। वह सिद्धार्थ के शव के पास बैठी फूट-फूटकर रो रही थीं।

बार-बार वह कह रही थीं, बेबी, तुम मुझे लेने नहीं आए... तू बोला था मुझे लेने आएगा। वह शव को ढके कपड़े को हटाने की गुहार लगाती रहीं, ताकि अपने मंगेतर का चेहरा एक बार देख सकें।

सोनिया की यह हालत देखकर वहां मौजूद पूर्व सैनिकों, परिवार वालों और आम लोगों की आंखें भी नम हो गईं। यह दुखद वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

28 वर्षीय सिद्धार्थ यादव बुधवार रात जामनगर एयरफोर्स स्टेशन के पास एक नियमित उड़ान के दौरान दुर्घटना का शिकार हो गए। वह भारतीय वायुसेना के जगुआर लड़ाकू विमान को उड़ा रहे थे, जब यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

हादसे में एक पायलट को बचाया गया, लेकिन सिद्धार्थ की जान नहीं बच सकी। उनकी शहादत की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया।

सिद्धार्थ एक सैनिक परिवार से थे। उनके पिता सुशील यादव वायुसेना में सेवारत रहे, जबकि दादा और परदादा भी सेना का हिस्सा थे।

सुशील यादव ने कहा कि उन्हें सिद्धार्थ पर हमेशा गर्व रहेगा। वह उनका इकलौता बेटा था, एक होनहार छात्र और जांबाज सैनिक।

उन्होंने बताया कि सिद्धार्थ की सगाई 23 मार्च को हुई थी और वह 31 मार्च को ही जामनगर ड्यूटी पर लौटा था। उन्हें गुरुवार रात 11 बजे कमांडिंग एयर ऑफिसर का फोन आया, जिसमें हादसे और बेटे की शहादत की खबर दी गई।

रेवाड़ी में सिद्धार्थ की अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। हाथों में तिरंगा थामे लोगों ने उनके पार्थिव शरीर पर फूल बरसाए।

सैन्य सम्मान के साथ जब उनकी चिता को अग्नि दी गई, तो पूरा माहौल गमगीन हो गया। सिद्धार्थ की छोटी बहन और माता-पिता भी इस दुख को सहते हुए मौजूद रहे।

सिद्धार्थ और सोनिया की कहानी अधूरी रह गई। 10 दिन पहले सगाई की खुशियां मनाने वाला यह जोड़ा शादी की तैयारियों में जुटा था। सोनिया के लिए सिद्धार्थ न सिर्फ मंगेतर थे, बल्कि उनकी जिंदगी का आधार भी।

सोनिया की पुकार ने न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे देश को भावुक कर दिया।

सिद्धार्थ जैसे सैनिक हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर देश की रक्षा करते हैं। यह हादसा एक बार फिर हमें सैनिकों के बलिदान की याद दिलाता है।

वायुसेना ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

सिद्धार्थ की शहादत पर हरियाणा के मुख्यमंत्री ने शोक जताया और कहा कि पूरा राज्य उनके साथ खड़ा है।

यह अंतिम विदाई न सिर्फ एक सैनिक की शहादत की कहानी है, बल्कि एक अधूरी प्रेम कहानी का दुखद अंत भी है, जिसने हर दिल को छू लिया। सिद्धार्थ भले ही चले गए हों, लेकिन उनकी वीरता और सोनिया की ये पुकार हमेशा याद रहेगी।

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