हर मस्जिद निशाने पर: वक्फ संशोधन बिल पर मोहम्मद अदीब का बड़ा बयान
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वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को मुसलमानों की धार्मिक आज़ादी पर हमला बताते हुए पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद की शहादत एक मस्जिद तक सीमित थी, लेकिन अब हर मस्जिद निशाने पर है। इस बयान से मुस्लिम समाज में गहरी बेचैनी है और देशभर में विरोध की तैयारी की जा रही है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस विधेयक पर गहरी चिंता जताई है और दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद समेत कई शहरों में प्रदर्शन की रणनीति बनाई जा रही है।

सरकार द्वारा संसद में पेश किया गया वक्फ संशोधन विधेयक 2025 मुस्लिम समाज में बड़े पैमाने पर चिंता का विषय बन गया है। यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन, प्रशासन और नियंत्रण को सरकार के अधीन लाने की कोशिश करता है। इसके ज़रिए वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता कम कर दी जाएगी और सरकार को वक्फ संपत्तियों के उपयोग पर अधिक अधिकार मिल जाएगा।

मोहम्मद अदीब समेत कई मुस्लिम नेता इस विधेयक को समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पर हमला मानते हैं।

पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब ने इस विधेयक के खिलाफ खुलकर आवाज़ उठाई है। उन्होंने कहा, बाबरी मस्जिद की शहादत एक प्रतीकात्मक हमला था। परंतु अब इस विधेयक के ज़रिए हर मस्जिद, कब्रिस्तान, मदरसा और वक्फ की संपत्ति को सरकार अपने नियंत्रण में लेना चाहती है।

अदीब का मानना है कि यह विधेयक केवल क़ानूनी मसला नहीं है, बल्कि यह मुसलमानों की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक स्वायत्तता पर सीधा प्रहार है।

अदीब ने साफ शब्दों में कहा कि बाबरी मस्जिद का मसला अगर मुसलमानों ने पूरी ताक़त से लड़ा होता, तो आज वक्फ संपत्तियाँ खतरे में न होतीं। उनका कहना है, हमने बाबरी मस्जिद के मामले में न्याय के लिए लंबा इंतज़ार किया। अब वक्फ संशोधन विधेयक के ज़रिए हर मस्जिद पर कब्जे की तैयारी हो रही है।

भारत में 8 लाख एकड़ से अधिक वक्फ संपत्तियाँ हैं, जिनमें मस्जिदें, मदरसे, कब्रिस्तान और दरगाहें शामिल हैं। इन संपत्तियों का उपयोग मुस्लिम समुदाय के सामाजिक और धार्मिक कार्यों में होता है। अदीब ने चेतावनी दी कि यदि ये संपत्तियाँ सरकार के अधीन चली गईं, तो समुदाय की धार्मिक स्वायत्तता समाप्त हो जाएगी।

मोहम्मद अदीब ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद, और अन्य संगठनों से अपील की कि वे सभी मतभेद भूलकर एक मंच पर आएं। जब तक हम एकजुट नहीं होंगे, तब तक सरकार हमारी धार्मिक पहचान को निशाना बनाती रहेगी। उनका यह भी कहना था कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के विरुद्ध है, जो धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं।

दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में अदीब ने ऐलान किया कि यदि विधेयक वापस नहीं लिया गया तो देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि लखनऊ, पटना, हैदराबाद और मुंबई में बड़े धरने-प्रदर्शन की तैयारी है। हम अपने धर्मस्थलों की रक्षा के लिए संवैधानिक तरीके से संघर्ष करेंगे।

कानूनविदों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह विधेयक धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर सीधा आघात है। दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नूर हसन का कहना है, सरकार को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि किसी भी वक्फ संपत्ति को उसकी धार्मिक प्रकृति से अलग नहीं किया जा सकता।

अदीब ने जो चिंता जताई है, वह न सिर्फ उनकी है बल्कि पूरे मुस्लिम समाज की भावना को दर्शाती है। वक्फ संपत्तियाँ केवल इमारतें नहीं हैं, वे हमारी धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान की प्रतीक हैं। यह ज़रूरी है कि हर भारतीय नागरिक, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, संविधान की आत्मा की रक्षा के लिए इस विषय को समझे। अदीब की आवाज़ एक अलार्म है, जिसे अब अनसुना नहीं किया जा सकता।

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