वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के संसद में पारित होने के बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) में असंतोष की लहर दौड़ गई है। पार्टी के कई प्रमुख नेताओं ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
नदीम अख्तर, मोहम्मद कासिम अंसारी, एम राजू नैयर, नवाज मलिक और तबरेज सिद्दीकी अलीग जैसे नेताओं ने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है। इस स्थिति को संभालने के लिए पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है, जिसमें अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अशरफ असांरी, गुलाम गौस और अफाक अहमद खान जैसे नेता शामिल होंगे।
ढाका विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी रहे मो. कासिम अंसारी और जमुई से जेडीयू अल्पसंख्यक प्रदेश सचिव मो. शाहनवाज मलिक ने 3 अप्रैल को ही इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष नीतीश कुमार को भेजे अपने इस्तीफे में कहा कि उन्हें विश्वास था कि नीतीश कुमार एक धर्मनिरपेक्ष नेता हैं, लेकिन वक्फ बिल को समर्थन देकर पार्टी ने उनका भरोसा तोड़ा है।
नवादा जिले में भी जेडीयू को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के जिला सचिव मोहम्मद फिरोज खान ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है और कहा कि वे आरएसएस के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। फिरोज खान ने यह भी दावा किया कि पार्टी के कई मुस्लिम नेताओं और कार्यकर्ताओं में इस मुद्दे को लेकर नाराजगी है, जिसका असर आगामी विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है।
फिरोज खान, जो नवादा में एक प्रभावशाली सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं, ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार मुस्लिम समुदाय के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने बिहार के मुस्लिम समुदाय से नीतीश कुमार और जेडीयू से दूरी बनाने की अपील की है। उनके इस्तीफे के बाद माना जा रहा है कि कुछ और मुस्लिम नेता भी पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं।
पिछले विधानसभा चुनावों में जेडीयू के रणनीतिकारों ने महसूस किया कि मुस्लिम मतदाताओं ने पार्टी से दूरी बना ली थी। अब सवाल यह है कि क्या जेडीयू 2025 के चुनाव में पिछली बार जितने मुस्लिम उम्मीदवार उतारेगी?
बिहार में मुस्लिम मतदाता 17-20 प्रतिशत हैं, इसलिए जेडीयू की रणनीति 80 प्रतिशत मतदाताओं को साधने की है। पार्टी का वक्फ बिल को समर्थन इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। नीतीश कुमार के रुख में 2005 के बाद पहली बार बदलाव देखने को मिल रहा है। 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने 115 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें 10 प्रतिशत उम्मीदवार मुस्लिम थे।
2020 में एनडीए को 122 सीटें मिली थीं, जिनमें जेडीयू की 43 थीं। जेडीयू ने 11 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उनमें से एक भी नहीं जीता था। बिहार की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। लगभग 3-4 दर्जन सीटें मुस्लिम बहुल मानी जाती हैं। सीमांचल और मिथिलांचल में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। सिवान, भागलपुर, गोपालगंज और बेगूसराय में भी मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है। बिहार की 18 सीटें ऐसी हैं, जहां मुस्लिम मतदाता 30 से 60 प्रतिशत हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेडीयू के वक्फ बिल को समर्थन करने से ये मतदाता कांग्रेस, आरजेडी और जनसुराज जैसी पार्टियों में बंट सकते हैं।
*VIDEO | Bihar: Jamui Minority Pradesh secretary Shah Nawaz Malik resigns from JD(U) over Waqf (Amendment) Bill. Here s what he said:
— Press Trust of India (@PTI_News) April 3, 2025
It is unfortunate that Bihar CM Nitish Kumar has supported the Waqf (Amendment) Bill and I resign from the party because of this. All Muslims… pic.twitter.com/WeZ96Fs294
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