थाइलैंड, जिसे मुस्कान की भूमि भी कहा जाता है, आज दुनिया के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका नाम हमेशा थाइलैंड नहीं था? एक समय में इसे सियाम के नाम से जाना जाता था। आइए जानते हैं इस नाम परिवर्तन के पीछे की कहानी और भारत के साथ इसके सदियों पुराने संबंध के बारे में।
छठवीं से 11वीं शताब्दी के बीच, ताई भाषी समूहों का एक बड़ा हिस्सा दक्षिण-पश्चिमी चीन से दक्षिण-पूर्व एशिया की मुख्य भूमि की ओर चला गया। शुरुआत में, ये लोग कंबोडिया शासन के अधीन रहे।
13वीं शताब्दी में, सियाम में पहली बार ताई भाषी लोगों का अपना शासन शुरू हुआ, जिसे सुखोथाई राजवंश के रूप में जाना जाता है। 14वीं शताब्दी में अयुथया किंगडम का उदय हुआ, जो दक्षिण पूर्व एशिया में एक प्रमुख शक्ति बनकर उभरा। बर्मा के सैन्य अभियान के चलते इस साम्राज्य का पतन होने के बाद थोन बूरी किंगडम सत्ता में आया। इसके बाद साल 1782 में राम-1 ने चक्री राजवंश की शुरुआत की, जिसने 20वीं शताब्दी तक शासन किया।
1932-33 में महामंदी, चावल की कीमतों में गिरावट और सार्वजनिक खर्च में कमी के कारण सियाम को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके कारण सियाम के अभिजात वर्ग के लोगों के बीच असंतोष पैदा होने लगा। लोगों ने राजशाही के विरुद्ध विद्रोह कर दिया, जिसके बाद सियाम एक निरंकुश राजशाही से संवैधानिक राजशाही में बदल गया।
संवैधानिक राजशाही शुरू होने के बाद, साल 1939 में सियाम का नाम बदलकर थाइलैंड कर दिया गया। थाई शब्द वास्तव में ताई से लिया गया है। हालांकि, साल 1945 में एक बार फिर से थाइलैंड का नाम सियाम किया गया पर 1949 में यह फिर से थाइलैंड हो गया। थाई का मतलब है स्वतंत्रता और लैंड को भूमि कहते हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया में थाइलैंड एकमात्र ऐसा देश है, जिस पर कभी यूरोप का शासन नहीं रहा। इसके सभी पड़ोसी देशों जैसे बर्मा और मलेशिया पर ब्रिटेन का शासन रहा तो लाओस और कंबोडिया फ्रांसीसी उपनिवेश का हिस्सा रहे।
भारत के साथ थाइलैंड का संबंध सदियों पुराना है। थाइलैंड में पहले राजवंश सुखोथाई ने भारत से वहां तक प्रसारित हुए बौद्ध धर्म को संरक्षण दिया था। भारत में नालंदा से थाइलैंड के अयुत्थया तक विद्वानों का आदान-प्रदान होता रहा है।
राम की कथा भी थाइलैंड के जनजीवन का अहम हिस्सा है। पुत्थयोत्फा चालुलोक ने जब Chakri (चक्री) राजवंश की शुरुआत की तो खुद को राम-1 की उपाधि दी थी। रामायण को थाइलैंड में रामाकियन के रूप में जाना जाता है।
भारत के साथ थाइलैंड के राजनयिक संबंध साल 1947 से ही हैं। साल 1993 में भारत ने लुक ईस्ट की नीति शुरू की, जो अब एक्ट ईस्ट नीति के रूप में काम कर रही है। वहीं, थाइलैंड ने साल 1996 में लुक वेस्ट नीति शुरू की थी जो अब एक्ट वेस्ट के रूप में काम कर रही है।
साल 2019 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 12.12 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। साल 2021-22 में यह लगभग 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो सर्वकालिक उच्च स्तर था। दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध भी मजबूत हैं।
*BIMSTEC is an important forum to further global good. It is imperative we strengthen it and deepen our engagement. In this context, I proposed a 21-point Action Plan covering different aspects of our cooperation. pic.twitter.com/6lsTbLwAGc
— Narendra Modi (@narendramodi) April 4, 2025
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