वक्फ बिल पर राज्यसभा में घमासान: विपक्ष ने बताया लोकतंत्र की हत्या , खरगे ने कहा सरकार नकारात्मक
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राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्ष ने सरकार पर जमकर हमला बोला है, वहीं सरकार का कहना है कि यह ऐतिहासिक सुधार है।

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष ने बिल पर अपने विचार रखे, लेकिन सरकार पहले से ही नकारात्मक रुख अपनाए हुए थी और इसे जबरन आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की बात सुनने को तैयार नहीं थी।

खरगे ने मणिपुर हिंसा पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य में हालात बदतर हैं, सैकड़ों लोग मारे गए, महिलाओं से अत्याचार हुआ, घर जलाए गए और स्कूल-कॉलेज अब भी बंद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार समाधान देने में विफल रही है और खुद प्रधानमंत्री को मणिपुर जाकर इस संकट को सुलझाना चाहिए।

AAP सांसद संजय सिंह ने वक्फ संशोधन विधेयक के राज्यसभा में पारित होने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि आज बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के संविधान और लोकतंत्र की हत्या की गई है। संख्याबल के बल पर असंवैधानिक विधेयक पास किया गया है। उन्होंने कहा कि AAP ने इस बिल का विरोध किया है क्योंकि यह संविधान के खिलाफ है।

राज्यसभा में यह बिल 13 घंटे की मैराथन चर्चा के बाद पारित हुआ। पक्ष में 128 और विरोध में 95 मत पड़े। लोकसभा पहले ही इसे मंजूरी दे चुकी है। बिल पास होने से पहले एनडीए और विपक्षी सांसदों में तीखी बहस हुई। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार अल्पसंख्यकों को डराने के लिए यह बिल नहीं लाई है।

सांसद मनोज कुमार झा ने बिल पर असंतुष्टि जताते हुए कहा कि इस संसद में कृषि कानून भी पारित हुए थे। बहुत लंबी बहस हुई, लोगों के मन में अभी भी असंतुष्टि है, अगर उसे दूर नहीं किया तो इसका हश्र कृषि कानूनों जैसा न हो।

विपक्ष इस बिल को असंवैधानिक और मुस्लिमों के खिलाफ बता रहा है, जबकि सरकार का दावा है कि यह पारदर्शिता बढ़ाएगा और वक्फ बोर्डों के कामकाज में सुधार लाएगा। सरकार का कहना है कि वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की भागीदारी से फैसलों की गुणवत्ता बढ़ेगी। सेंट्रल वक्फ काउंसिल में 22 मेंबर होंगे, जिनमें 4 से ज्यादा गैर-मुस्लिम नहीं होंगे।

यह बिल संयुक्त संसदीय समिति (JPC) और हितधारकों के सुझावों को शामिल करने के बाद पारित हुआ है। अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह कानून बन जाएगा।

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