सगाई के 10 दिन बाद शहीद, जामनगर जगुआर क्रैश में इकलौते बेटे सिद्धार्थ की शहादत
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गुजरात के जामनगर में बुधवार रात क्रैश हुए जगुआर फाइटर प्लेन के शहीद पायलट, फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव की यह हृदयविदारक कहानी है। 28 वर्षीय सिद्धार्थ हरियाणा के रेवाड़ी के रहने वाले थे।

परिवार में शादी की तैयारियां चल रही थीं, और इसी बीच उनकी शहादत की खबर आई, जिसने खुशियों को मातम में बदल दिया। परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार, 23 मार्च को ही सिद्धार्थ की सगाई हुई थी। 31 मार्च को वे छुट्टी पूरी कर जामनगर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे थे, और दो दिन बाद ही यह दुखद हादसा हो गया।

सिद्धार्थ के पिता सुशील यादव ने बताया कि कमांडिंग एयर ऑफिसर ने उन्हें रात 11 बजे विमान दुर्घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है, एक पायलट को बचा लिया गया है, लेकिन उनका बेटा शहीद हो गया।

सुशील यादव ने आगे बताया कि 23 मार्च को सिद्धार्थ की सगाई हुई थी। जनवरी 2016 में उसने एनडीए कोर्स 135 में दाखिला लिया था। वह एक मेधावी छात्र था, और परिवार को हमेशा उस पर गर्व था। उन्होंने बताया कि उनके पिता और दादा भी सेना में थे, और वे खुद भी वायुसेना में थे। उन्होंने कहा कि उन्हें सिद्धार्थ पर बहुत गर्व है, क्योंकि उसने एक जान बचाते हुए अपनी जान गंवा दी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह दुख की बात है क्योंकि वह उनका इकलौता बेटा था।

सिद्धार्थ रेवाड़ी के भालखी माजरा गांव के रहने वाले थे, लेकिन कुछ साल पहले ही उनके पिता ने रेवाड़ी सेक्टर 18 में घर बनाया था, जहां अब उनका परिवार रहता है। सिद्धार्थ की एक छोटी बहन भी है। शहीद का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव भालखी-माजरा में किया जाएगा।

सगाई की छुट्टी से वापस लौटकर सिद्धार्थ 2 अप्रैल को रूटीन सॉर्टी के लिए जगुआर विमान लेकर निकले थे। उनके साथ अन्य साथी मनोज कुमार सिंह भी थे। उड़ान के दौरान विमान में कुछ खराबी आ गई। फाइटर प्लेन को सही तरीके से लैंड करने की कई कोशिश की गई, लेकिन सभी विफल रहीं।

अपनी जान की परवाह किए बगैर सिद्धार्थ ने अपने साथी को इजेक्ट कराया, और फिर विमान को घनी आबादी वाले इलाके में गिरने से बचाने के लिए वे प्लेन में ही रहे। उन्होंने विमान को घनी आबादी से दूर ले जाने में सफलता प्राप्त की, जहाँ प्लेन क्रैश हो गया। इस हादसे में किसी और को कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन सेना के एक समर्पित परिवार ने अपने परिवार का इकलौता चिराग खो दिया।

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