कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पर चर्चा के दौरान सरकार से इसे वापस लेने की अपील की. उन्होंने विधेयक को असंवैधानिक बताया.
प्रतापगढ़ी ने कहा कि सरकार इस बिल को मुसलमानों के लिए उम्मीद बता रही है, लेकिन वास्तव में यह नाउम्मीद है. उन्होंने दिल्ली की उन 123 संपत्तियों का ज़िक्र किया, जिनको लेकर केंद्र सरकार कांग्रेस पर हमलावर है.
उन्होंने कहा कि वक्फ ट्रिब्यूनल को मजहबी खाप पंचायत बताया जाता है, जबकि सच्चाई यह है कि यह एक सरकारी न्यायिक विभाग है, जिसमें सरकार द्वारा नियुक्त जज और प्रशासनिक अधिकारी होते हैं.
प्रतापगढ़ी ने गृहमंत्री के दावे का खंडन करते हुए कहा कि वक्फ एक्ट 1995 की धारा 83 (9) के तहत हाई कोर्ट वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले की समीक्षा कर सकती है और उसे पलट भी सकती है.
उन्होंने रायसीना हिल की कहानी बताते हुए कहा कि 1911 में जब अंग्रेजी हुकूमत ने कोलकाता की जगह दिल्ली को राजधानी बनाने का फैसला किया, तो रायसीना हिल्स के चारों तरफ मुसलमानों की ढेर सारी जमीनें थीं. इन जमीनों को अधिग्रहित किया गया और लुटियंस को इसकी तामीर की जिम्मेदारी दी गई.
सेंट्रल विस्टा की तरह लुटियंस जोन का मेगा प्लान तैयार हुआ. उस समय मुसलमानों ने अपनी इबादतगाहों को बचाने के लिए अंग्रेज हुकूमत से लड़ाई लड़ी. तब फैसला हुआ कि धार्मिक स्थल जस के तस रहने दिए जाएं.
इंडिया गेट के बगल वाली मस्जिद, सुनहरी बाग मस्जिद, और पार्लियामेंट रोड वाली मस्जिद जैसी 123 संपत्तियों के मैनेजमेंट के लिए 1913 में मुसलमान वक्फ वैलिडेशन एक्ट बना. इसके बाद एक नया शहर बसाया गया, जिसे लुटियंस जोन का नाम दिया गया.
1943 और 45 के बीच एक और समझौता हुआ, जिसके तहत सुन्नी मजलिस को इन संपत्तियों की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई. गृहमंत्री जिन 123 संपत्तियों की बात कर रहे हैं, वे इसी मजलिस के तहत आती हैं.
प्रतापगढ़ी ने कहा कि भारत की आजादी के बाद 1954 में वक्फ एक्ट लागू हुआ और 1964 में केंद्रीय वक्फ काउंसिल का गठन हुआ. दिल्ली की वही 123 प्रॉपर्टीज को 1970 में सर्वे गैजेट करके गजट नोटिफाई किया गया.
इन संपत्तियों के निपटारे के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1974 में एक बरनी कमेटी बनाई. बरनी कमेटी ने 1976 में 123 संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड की संपत्ति होने की रिपोर्ट सौंपी.
इसी रिपोर्ट के आधार पर 1984 में कांग्रेस सरकार ने 123 प्रॉपर्टीज को दिल्ली वक्फ को सौंपने का फैसला किया. इसके खिलाफ विश्व हिंदू परिषद कोर्ट गई, मामला 2011 तक पेंडिंग रहा.
2011 में कोर्ट ने सरकार को केस का निपटारा करने का आदेश दिया. तब 2013 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने दिल्ली की 123 संपत्तियों को बरनी कमेटी की सिफारिश के मुताबिक वक्फ बोर्ड के हवाले कर दिया. यही वह संपत्तियां हैं जिनके नाम से गृहमंत्री जी कांग्रेस को कोस रहे हैं.
*हमीं को क़ातिल कहेगी दुनिया,
— Imran Pratapgarhi (@ShayarImran) April 3, 2025
हमारा ही क़त्लेआम होगा।
हमीं कुँए खोदते फिरेंगे,
हमीं पे पानी हराम होगा।
वक्फ़ बिल पर आज देश की संसद में अपनी बात रखते हुए।#WaqfAmendmentBill #RejectWaqfBill pic.twitter.com/qcQCBVx9va
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