क्या वक्फ संशोधन बिल पर राहुल गांधी की गैर-मौजूदगी से मुस्लिम समुदाय नाराज़ है?
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नई दिल्ली: वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पर संसद में ज़ोरदार बहस हुई। 12 घंटे से अधिक समय तक चली चर्चा के बाद लोकसभा ने देर रात इस विधेयक को मंजूरी दे दी। वोटिंग में 288 सांसदों ने बिल के पक्ष में और 232 ने विरोध में मतदान किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने वोटिंग करवाई और विधेयक पास हो गया।

इस चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी सदन में मौजूद नहीं थे। वह देर रात 10 बजे पहुंचे, जिसके बाद उनकी गैर-मौजूदगी पर सवाल उठने लगे। मुस्लिम स्कॉलर मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने इसे लेकर नाराजगी जताई।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद ने कहा, हमें उम्मीद थी कि टीडीपी और जेडीयू मुसलमानों के साथ खड़े होंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि राहुल गांधी ने वक्फ जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर लोकसभा में कोई बयान नहीं दिया। इससे मुस्लिम समुदाय में निराशा हुई है। कांग्रेस को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने यह भी कहा कि अगर राज्यसभा वक्फ (संशोधन) विधेयक पास करती है, तो वे इसे अदालत में चुनौती देंगे। उन्होंने कहा, अगर यह विधेयक राज्यसभा में भी पास होता है, तो हम इसे अदालत में लेकर जाएंगे। हमें पूरा भरोसा है कि संविधान के आधार पर हमें न्याय और राहत जरूर मिलेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) और चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी से उम्मीद थी कि वे इस विधेयक का विरोध करेंगे क्योंकि उनके राज्यों में मुस्लिम समुदाय का समर्थन उन्हें मिलता रहा है। हमें उम्मीद थी कि जेडीयू और टीडीपी इस बिल के खिलाफ खड़े होंगे। हमें यह भी लगता है कि विपक्ष को इस विधेयक का विरोध और ज्यादा तथ्यों और आंकड़ों के साथ करना चाहिए था। विपक्ष ने आपत्तियां तो जताईं, लेकिन उन्हें इसे और मजबूत तरीके से रखना चाहिए था।

मौलाना महली ने कहा कि विपक्ष के सदस्यों ने अपनी बात रखी, लेकिन उन्हें और ठोस तथ्यों के साथ इसका विरोध करना चाहिए था। इससे पहले, गौरव गोगोई और असदुद्दीन ओवैसी ने बिल में संशोधन का प्रस्ताव रखा था, लेकिन सभी संशोधन खारिज कर दिए गए। अब यह बिल राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां फिर से बहस की संभावना है।

लोकसभा में बिल पारित होने के बाद केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा, यह बिल मुसलमानों के खिलाफ नहीं है। लोकसभा में इसे 288 वोटों से पास किया गया है। यह बिल गरीब मुसलमानों को न्याय देने के लिए लाया गया है। राज्यसभा में भी यह पास होगा। मोदी सरकार ने बहुत बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाया है।

सीपीआई सांसद पी. संतोष कुमार ने बिल पर आपत्ति जताते हुए कहा, हम इस विधेयक का विरोध करते हैं। सरकार इसे हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदाय के बीच का मुद्दा बनाना चाहती है। यह संविधान के खिलाफ है।

बहरहाल अब देखना होगा कि राज्यसभा में यह बिल कितनी आसानी से पास होता है या फिर इसे लेकर नया विवाद खड़ा होता है।

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