लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पारित हो गया है. इस बिल में वक्फ बोर्ड के गठन और संपत्तियों के नियमन में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं. इनमें सबसे अहम बदलाव है, पहले से चली आ रही व्यवस्था वक्फ बाई यूजर को खत्म करना.
वक्फ बाई यूजर का मतलब है, ऐसी कोई जमीन जिसे पहले से मस्जिद, इमामबाड़ा या कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, उसे वक्फ की संपत्ति माना जाएगा. भले ही उस संपत्ति के दस्तावेज वक्फ के पास न हों. नए प्रावधानों के अनुसार, अब सिर्फ वही संपत्ति वक्फ मानी जाएगी जिसे औपचारिक तौर पर लिखित दस्तावेज या वसीयत के जरिए वक्फ को सौंपा गया हो. ऐसे में उस संपत्ति के लीगल डॉक्यूमेंट वक्फ बोर्ड के पास होना जरूरी हैं.
पहले की व्यवस्था में, अगर कोई संपत्ति, जैसे मस्जिद, कब्रिस्तान या दरगाह, लंबे समय से मुस्लिम समुदाय द्वारा धार्मिक या सामुदायिक कामों के लिए इस्तेमाल हो रही है, तो उसे बिना किसी कानूनी दस्तावेज या ऐलान के, वक्फ मान लिया जाता था. लोकसभा से पारित विधेयक में इस प्रावधान को खत्म कर दिया गया है.
कानून बनने के बाद, अगर कोई जमीन या इमारत वर्षों से मस्जिद या कब्रिस्तान के तौर पर इस्तेमाल हो रही है, लेकिन वक्फ बोर्ड के पास उसके कोई कानूनी दस्तावेज नहीं हैं, तो अब उसे वक्फ नहीं माना जाएगा. नए प्रावधानों में हर वक्फ संपत्ति की जिला कलेक्टर की ओर से जांच की जाएगी.
सरकार का कहना है कि पहले ऐसी कई शिकायतें आई थीं कि वक्फ बोर्ड ने बगैर किसी कानूनी दस्तावेज के जमीनों पर कब्जे किए हैं. राज्यसभा में बिल पेश करते हुए मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कोई भी प्रॉपर्टी हो उसके दस्तावेज तो होने चाहिए. वक्फ बाई यूजर के नाम पर सिर्फ इस्तेमाल के आधार पर किसी प्रॉपर्टी को वक्फ घोषित नहीं किया जा सकता.
बीजेपी सांसद डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि वक्फ बाई यूजर इनका बड़ा हथियार था. किसी की जमीन पर कुछ दिन नमाज क्या पढ़ ली, वक्फ बाई यूजर के तहत वो जमीन वक्फ बोर्ड की हो जाती थी. उन्होंने तमिलनाडु में 1500 साल पुराने मंदिर को भी वक्फ प्रॉपर्टी घोषित किए जाने का दावा किया.
कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन बिल का विरोध कर रहे हैं. उनका आरोप है कि सरकार की नजर संपत्तियों पर है और वह इसे हथियाना चाहती है. उन्होंने कहा कि 500-हजार साल पुरानी मस्जिदों के कागज कहां से लाएंगे. उनका कहना है कि अगर कोई प्रॉपर्टी या संस्थान आज अस्तित्व में है और उसका लंबे वक्त से इस्तेमाल हो रहा है तो वह वक्फ की संपत्ति मानी जानी चाहिए.
जीपीसी कमेटी के चेयरमैन जगदंबिका पाल ने बताया कि अब वक्फ बाई यूजर नहीं, बल्कि वक्फ बाई डीड होगा और वह रजिस्टर्ड होगा. उस प्रॉपर्टी को वामसी पोर्टल पर 6 महीने के भीतर रजिस्टर्ड भी कराना होगा. इसका मकसद है कि अगर कोई जमीन वक्फ की है तो बाकी लोगों को भी पता होना चाहिए, और उसके कानूनी दस्तावेज भी होने जरूरी हैं.
Waqf by user cannot be arbitrary: Hon ble Union Minister of Parliamentary Affairs & Minority Affairs Shri @KirenRijiju ji@MOMAIndia#Parliament #WaqfAmendmentBill pic.twitter.com/gK8hrk6fgv
— Office of Kiren Rijiju (@RijijuOffice) April 3, 2025
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