लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान बुधवार को जमकर हंगामा हुआ. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बिल की कॉपी को फाड़ दिया और सरकार पर मुसलमानों को जलील करने का आरोप लगाया.
ओवैसी ने कहा कि यह बिल मुस्लिमों को उनके धार्मिक अधिकारों से वंचित करता है. उन्होंने अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 26 (धार्मिक संस्थानों के संचालन का अधिकार) का हवाला देते हुए कहा कि इस विधेयक के माध्यम से मुस्लिमों को उनके धार्मिक संस्थानों पर प्रशासनिक अधिकार से वंचित किया जा रहा है.
ओवैसी ने सरकार पर मुस्लिमों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया और कहा कि यह अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि मस्जिदों और मदरसों को निशाना बनाया जा रहा है.
ओवैसी ने गांधीजी का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह गांधीजी ने उस कानून को फाड़ा था जो उन्हें स्वीकार्य नहीं था, उसी तरह वह भी इस बिल को फाड़ते हैं.
ओवैसी ने कहा कि इस विधेयक के लागू होने से वक्फ संपत्तियों पर कब्जे को कानूनी मान्यता मिल जाएगी. उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने वक्फ संपत्ति पर कब्जा कर लिया, तो सरकार इस पर लिमिटेशन एक्ट लागू करेगी, जिससे रातों-रात अतिक्रमणकर्ता उस संपत्ति का कानूनी मालिक बन जाएगा.
ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर मुस्लिम वक्फ संपत्तियों को कमजोर कर रही है ताकि मुसलमानों की आर्थिक और शैक्षणिक प्रगति को रोका जा सके.
ओवैसी ने सरकार पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मुस्लिम सदस्यों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अनुसूचित जनजाति से है और वह मुस्लिम है, तो क्या उसे उसके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जाएगा?
ओवैसी ने कहा कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों से संबंधित मामलों में न्यायिक अपील के अधिकार को समाप्त कर देगा. उन्होंने यह भी बताया कि वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति में अब गैर-मुस्लिमों को भी शामिल किया जा सकता है, जिससे वक्फ बोर्ड मुसलमानों के हितों की रक्षा नहीं कर सकेगा.
संशोधन विधेयक पेश करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 123 प्रॉपर्टी वक्फ को दीं. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने समाज के हर वर्ग से राय ली है.
Asaduddin Owaisi tore in the Waqf amendment bill in the parliament.
— Sunanda Roy 👑 (@SaffronSunanda) April 2, 2025
Isn t this disrespectful for our Indian Parliament and Constitution ?
He must be thrown out of the Parliament right now pic.twitter.com/eGy6TE0fJt
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