केंद्र की मोदी सरकार आज लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश करने जा रही है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू इसे पेश करेंगे। सरकार को एनडीए सहयोगियों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू, चिराग पासवान और जयंत चौधरी की पार्टियां शामिल हैं।
विपक्ष इस प्रस्तावित कानून का एकजुट होकर विरोध कर रहा है। विपक्ष ने इस विधेयक को विभाजनकारी और असंवैधानिक बताया है। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि सभी विपक्षी दल इस विधेयक का एकजुटता से विरोध करेंगे।
विपक्षी दलों की मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसका उद्देश्य विधेयक को चुनौती देने के लिए रणनीति तैयार करना था। इस बैठक में विपक्षी नेताओं ने सरकार की नीतियों और प्रस्तावित विधेयक की आलोचना की, जिसे उन्होंने समुदायों के बीच विभाजन को बढ़ावा देने वाला करार दिया।
कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), एआईएमआईएम और सीपीआई (एम) जैसे विपक्षी दलों ने विधेयक की कड़ी आलोचना की है। उनका तर्क है कि यह मुसलमानों के प्रति भेदभावपूर्ण है और धार्मिक स्वतंत्रताओं पर अतिक्रमण करता है।
एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इसे वक्फ बर्बाद विधेयक बताया है। ओवैसी ने कहा कि इसका उद्देश्य वक्फ कानूनों को कमजोर करना और वक्फ संपत्तियों को हड़पने का मार्ग आसान करना है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि विपक्षी दल संसद के पटल पर मोदी सरकार के असंवैधानिक और विभाजनकारी एजेंडे के खिलाफ मिलकर काम करेंगे।
सरकार के पास इस विधेयक को पास कराने के लिए लोकसभा में संख्याबल है। लोकसभा में बिल पास कराने के लिए 272 का आंकड़ा जरूरी है। केंद्र की एनडीए सरकार के पास 293 सांसद हैं।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के दावों को भ्रामक बताते हुए आलोचना का सामना किया है और कहा है कि वक्फ नियम स्वतंत्रता से पहले से ही अस्तित्व में हैं। उन्होंने तर्क दिया है कि ये प्रावधान अवैध नहीं हैं और वक्फ प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार करने के उद्देश्य से हैं।
बीजेपी, कांग्रेस, टीडीपी समेत अन्य पार्टियों ने अपने सदस्यों को बहस और मतदान प्रक्रिया के दौरान उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन विधेयक पर सियासी संग्राम तय है।
केंद्र सरकार वक्फ संपत्ति कानून में बड़े बदलाव लाने जा रही है। नए कानून में धर्मांतरण के बाद वक्फ को संपत्ति देने पर रोक लगेगी। वक्फ बोर्ड में महिलाओं और गैर-मुस्लिमों को भी जगह मिलेगी। वक्फ की संपत्तियों का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखना होगा और सरकार ऑडिट करा सकेगी।
इस बिल में इस मामले पर पहले भी संशोधन हो चूके हैं। इससे पहले वर्ष 1995 में और फिर वर्ष 2013 में वक्फ बिल में बदलाव किए गए। दिलचस्प बात ये है कि ये दोनों संशोधित बिल सर्वसम्मति से पास हुए थे। जब ये दोनों बदलाव किए गए, 1995 में और 2013 में, कांग्रेस और उनके सहयोगियों की सरकारों द्वारा इन बदलावों को सर्वसम्मति से पास किया गया था और किसी भी पार्टी ने वोटिंग के दौरान इसका विरोध नहीं किया था। विरोध ना करने वाली पार्टियों में बीजेपी भी शामिल थी। आज वहीं बीजेपी इस बिल में बदलाव करना चाहती है।
All the Opposition parties are united and shall work together on the floor of the Parliament, to defeat the Unconstitutional and divisive agenda of the Modi Govt on the Waqf Amendment Bill. pic.twitter.com/VgqhCim1Cs
— Mallikarjun Kharge (@kharge) April 1, 2025
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