उत्तर प्रदेश में कच्चे तेल का खजाना: भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?
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उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सागरपल्ली गांव में कच्चे तेल का भंडार मिलना भारत के लिए एक बड़ी खबर है। इससे देश की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं।

बलिया जिले के सागरपल्ली गांव में क्रूड ऑयल का भंडार होने की पुष्टि हो चुकी है। ओएनजीसी ने इस क्षेत्र में खुदाई भी शुरू कर दी है। पिछले 3 महीनों से ओएनजीसी की टीम इस क्षेत्र में सर्वे कर रही थी। स्वतंत्रता सेनानी चिट्टू पांडे की जमीन पर खुदाई होने वाली है।

अब बड़े पैमाने पर ड्रिलिंग होगी, जिसके लिए जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। सागरपल्ली से लेकर प्रयागराज तक 300 किलोमीटर के इलाके में कच्चे तेल का अनुमानित भंडार पाया गया है। इस खोज के बाद प्रयागराज, वाराणसी और बलिया में जमीन की कीमतें बढ़ने की संभावना है।

ओएनजीसी को 3 महीने के सर्वे के बाद गंगा बेसिन के आसपास 3 किलोमीटर नीचे कच्चे तेल का पता चला है। चिट्टू पांडे की जमीन पर खुदाई का काम शुरू होगा और ओएनजीसी ने वहां पर 6.5 एकड़ जमीन 3 साल के लिए लीज पर ले ली है।

हालांकि, इस खुदाई में हर रोज 25,000 लीटर पानी का इस्तेमाल होगा, जो गंगा बेसिन के इलाके के लिए चिंता का विषय हो सकता है। अनुमान है कि अप्रैल 2025 तक खुदाई का काम खत्म हो जाएगा और 300 किलोमीटर के इलाके में कुएं खोदे जाएंगे।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का 89.4% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। रूस से 36% तेल आता है। 2024 से भारत इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से भी तेल आयात करता है।

इस खोज से आसपास की जमीन की कीमत बढ़ेगी, किसानों को फायदा होगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इस पूरे क्षेत्र का विकास होगा, जिसमें रोड कनेक्टिविटी, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं।

इतने बड़े प्रोजेक्ट को चलाने के लिए उन्नत तकनीक की जरूरत होगी। हालांकि, अगर तेल लीक होकर गंगा नदी में चला गया तो प्रदूषण फैलने का खतरा है। वायु और ध्वनि प्रदूषण भी संभावित समस्याएं हैं।

अगर सच में इतना ज्यादा क्रूड ऑयल मिल जाता है तो भारत की बारगेनिंग पावर बढ़ेगी। हालांकि, गंगा बेसिन का इलाका संवेदनशील होने के कारण पर्यावरण को नुकसान हो सकता है, इसलिए पर्यावरण को बचाना भी जरूरी है।

भारत के चार बड़े बेसिन महानदी, अंडमान, बंगाल और केरल-कोंकण अभी भी पूरी तरह से एक्सप्लोर नहीं किए गए हैं। अगर इन बेसिनों को एक्सप्लोर किया जाता है तो 22 बिलियन बैरल तेल मिलने की संभावना है, जिसकी कीमत 138 लाख करोड़ रुपये हो सकती है।

अगर यह काम आगे बढ़ता है और सफल होता है तो यह सिर्फ उत्तर प्रदेश का नहीं, बल्कि पूरे भारत का विकास करेगा। अप्रैल के अंत तक इस खोज से जुड़े कई सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।

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