सभी जानते हैं कि मातृत्व की राह गर्भावस्था के साहसिक काल से गुज़रती है, हर स्त्री इस अवधि में जो संयम और कष्ट को निभाती है उससे पूरी दुनिया अपरिचित है, अधिकतर महिलाएं कमज़ोरी के कारणों से इस अवधि में सक्रिय नहीं रह पाती जिसके कारण उनके शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, और यह प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर भी पड़ सकता है, ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि यदि आप गर्भवती हैं को अपने शरीर को जाम ना होने दें |
व्यायाम से गर्भावस्था में होने वाली कॉम्प्लीकेशन से बचा जा सकता है जैसे कि प्री- एक्लेम्पसिया। इतना ही नही गर्भावस्था में व्यायाम करने से नार्मल डिलिवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं और इससे प्रसव पीढ़ा सहने की भी शक्ति मिलती है।आज हम आपको कुछ ऐसे व्यायाम बता रहे हैं जो , न सिर्फ आपके शरीर को स्थिर होने से बचाएगा बल्कि आपके और आपके शिशु के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी भी होगा गर्भावस्था में व्यायाम करना अच्छा है साथ ही सुरक्षित भी है। शुरुवात में गर्भवती महिला को हफ्ते में दो या तीन दिन, 15 मिनट तक के लिए व्यायाम करना चाहिए। इसके बाद धीरे धीरे अपनी क्षमता के अनुसार समय और अवधि बढ़ाई जा सकती है। शुरू के तीन महीने में लो इम्पैक्ट एरोबिक्स, योगा, वेट ट्रेनिंग, स्ट्रेचिंग आदि आसानी से की जा सकती हैं।










Note- गर्भावस्था के दौरान घुड़सवारी, पहाड़ की चढ़ाई, खेल और कठोर और भारी व्यायाम बिलकुल न करें - व्यायाम के बाद एकदम सुस्ती लगे,बेहोशी छाये, धुंधला दिखाई दे, वेजाइना से खून आये, कमर, पेट या पेलविक में दर्द हो,सांस छोटी आये तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ
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