साल 2015 गुज़र गया और 2016 दस्तक देने को है ; मगर राजनीतिक दृष्टि से यदि देखा जाए तो ये वर्ष बेहद उठापटक वाला वर्ष साबित हुआ , और शायद इस वर्ष में जो कुछ घटित हुआ वह आगामी वर्षों पर बड़ा असर डालेगा । यदि निष्पक्षता से कहा जाए तो यह वर्ष भारत की राजनीति के लिए बेहद निराश करने वाला वर्ष रहा । क्यों कि इस वर्ष पर हमारे अपने ही देश का अन्ना खाने वाले लोगों ने देश की गरिमा पर प्रश्न चिह्न लगाया । बातें तो बहुत सी हैं मगर आइये नज़र डालते हैं वर्ष २०१५ की महत्वपूर्ण घटनाओं पर:

2014 की दूसरी छमाही में प्रचंड विजय गति पर सवार भाजपा को उस समय बहुत बड़ा झटका लगा जब , उसे दिल्ली चुनाव में सिर्फ तीन सीटों के साथ भारी पराजय का सामना करना पड़ा । फ्री इंटरनेट , फ्री बिजली - पानी को घोषणा पत्र बना कर बेहद कूटनीतिक रूप से लड़ा गया ये चुनाव अरविन्द केजरीवाल ने जीता और दूसरी बार मुख्यमंत्री बने ।

दो विपरीत विचारधारा की पार्टियों ने जम्मू कश्मीर में सरकार मिलकर बनाई । इस पर खूब घमासान मचा और बीजेपी की आलोचना भी हुई । दरअसल जिन मुद्दों पर बीजेपी ने चुनाव लड़ा था उनसे उलट विचारधारा वाली पार्टी पीडीपी से गठबंधन किसी को रास नहीं आया ।

संसद का मानसून सत्र पूरी तरह राजनीति की भेज चढ़ गया , कांग्रेसी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में लगातार हंगामा काटा जिससे कई महवपूर्ण बिल जिसमे प्रमुखता से वस्तु एवं सेवा कर भी शामिल था अधर में रह गए और देश का कई करोड़ रुपया बर्बाद हो गया ।

गुजरात में पटेल आंदोलन का चेहरा बन गए हार्दिक पटेल। सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में पटेलों को आरक्षण की मांग को लेकर गुजरात में आंदोलन भड़क उठा। हार्दिक ने पटेल समुदाय को ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण देने की मांग को लेकर अहमदाबाद में अगस्त महीने में बड़ी रैली आयोजित की थी। रैली के दौरान हार्दिक को हिरासत में ले लिया गया जिसके बाद राज्य में कई जगह पर हिंसा फैल गई, जिसमें एक पुलिस कांस्टेबल समेत 10 लोगों की मौत हो गई।

उत्तर प्रदेश के दादरी में हुई घटना ने देश में एक अजीब हंगामा खड़ा कर दिया , विपक्ष ने इस घटना के लिए आश्चर्य जनक रूप से केंद्र सरकार को दोषी बना दिया और मुस्लिमों पर बढ़ते अत्याचार शिगूफा छोड़ दिया । देश एमीन इसे असहिष्णुता का नाम दिया जाने लगा और कुछ लोग अपने अवार्ड वापस करने लग गए, ये श्रृंखला ऐसी चली कि पूरे देश की छवि धूमिल कर दी गई । भारत को एक असहिष्णु राष्ट्र के तौर पर प्रस्तुत करने के प्रयास अपने ही लोगों द्वारा किये गए ।

वन रैंक वन पेंशन की मांग पर धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों को लाल किले से 15 अगस्त ने जो आश्वासन प्रधानमंत्री ने दिया था , उसके ठीक 20 दिन के अंदर OROP की घोषणा कर पूर्व सैनिकों को बड़ी सौगात दी गई, फिर भी कुछ सैनिकों का असंतोष बना रहा । बताते चलें कि OROP लागू करवाने के लिए सैनिक पिछले 32 साल से संघर्ष कर रहे थे ।

बिहार चुनाव इस साल में भाजपा के लिए सबसे बड़ी हार रही । खुद प्रधानमंत्री द्वारा खुद को इस चुनाव में झोंक देने के बाद भी बिहार में बुरी तरह पार्टी हारी । घोटाले में दोषी करार हुए लालू के राजनीतिक जीवन का पुनर्जन्म हुआ, उनकी पार्टी बनी सबसे बड़ी पार्टी ।

नेशनल हेराल्ड मामले में सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका स्वीकार करते हुए , न्यायालय ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को पटियाला हॉउस कोर्ट में अभियुक्त के रूप में पेश होने का आदेश दिया , जिस पर 19 दिसम्बर को दोनों को पेश किया गया । जिस पर खूब हंगामा किया गया ।

मानसून सत्र की तरह यह सत्र भी कांग्रेस के निजी मुद्दों पर हंगामे की भेट चढ़ गया, और देश वासियों का करोडो रुपया बर्बाद हुआ , GST बिल इस बार भी पास नही हो सका ।

16 दिसंबर 2012 को हुए वीभत्स गैंग रेप का सबसे खूंखार आरोपी नाबालिग होने के कारण सुधार गृह से बरी हो गया । मगर इसके बाद संसद से किशोर न्याय अधिनियम में वयस्कता की उम्र घटा कर 16 साल कर दी गई ।
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