
क्रिसमस ट्री अर्थात क्रिसमस वृक्ष का क्रिसमस के मौके पर विशेष महत्व है। क्रिसमस ट्री ,जिस पर क्रिसमस के दिन बहुत सजावट की जाती है, एक सदाबहार वृक्ष है जो डगलस, बालसम या फर का पौधा होता है | फर के अलावा लोग चैरी के वृक्ष को भी क्रिसमस ट्री के रूप में सजाते थे। अगर लोग क्रिसमस ट्री को लेने में सक्षम नहीं होते थे तब वे लकड़ी के पिरामिड को एप्पल और अन्य सजावटों से इस प्रकार सजाते थे कि यह क्रिसमस ट्री की तरह लगे क्योंकि क्रिसमस ट्री का आकार भी पिरामिड के जैसा ही होता है।

यूं तो इसके कारण के कोई दृढ प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं फिर भी माना ये जाता है कि प्राचीनकाल में
रोमनवासी फर के वृक्ष को अपने मंदिर सजाने के लिए उपयोग करते थे। यूरोप के लोग भी सदाबहार
पेड़ की मालाओं, पुष्पहारों को जीवन की निरंतरता का प्रतीक मानते थे इसलिए ये लोग सदाबहार पौधों - पत्तियों से घरों को सजाते थे। उनका विश्वास था कि इन पौधों को घरों में सजाने से बुरी आत्माएं दूर
रहती हैं। यूं तो सदियों से सदाबहार फर को क्रिसमस ट्री के रूप में सजाने की परंपरा रही है। लेकिन
यीशू को मानने वाले लोग इसे ईश्वर के साथ अनंत जीवन के प्रतीक के रूप में सजाते हैं।

क्रिसमस ट्री सजाने की परंपरा की शुरुआत कई सदी पूर्व उत्तरी यूरोप से हुई , मगर माना जाता है कि इसे सजाने की प्रथा की शुरुआत प्राचीन काल में मिस्रवासियों, चीनियों या हिबू्र लोगों ने की थी। । पहले के समय में क्रिसमस ट्री गमले में रखने की जगह छतों से लटकाए जाते थे।

क्रिसमस ट्री को लेकर एक कहानी बहुत मशहूर है- हुआ यूं कि एक बार क्रिसमस पूर्व की रात में जब सर्दी कड़ाके की थी और बर्फ गिर रही थी ऐसे में एक बहुत छोटा सा बालक घूमते हुए अपने घर से दूर निकल जाता है। उस खोये हुए बच्चे को जब ठंड लगती है तब ठंड से बचने के लिए वह उपाय तलाश करता है तभी उसको एक झोपड़ी दिखाई देती है। उस झोपड़ी में एक लकड़हारा रहता था जो तब अपने परिवार के साथ अलाव ताप रहा था। वह छोटा बच्चा दरवाज़ा खटखटाता है । लकड़हारा दरवाज़ा खोलता है और बालक को ठंड में ठिठुरता देख अंदर बुला लेता है। उसकी पत्नी उस बालक को दुलार कर खाना खिलाती है और अपने सबसे छोटे बेटे के साथ उसे सुला देती है। क्रिसमस की सुबह लकड़हारे और उसके परिवार की नींद स्वर्गदूतों के गायन स्वर से खुलती है और वे देखते हैं कि वह छोटा बालक यीशु मसीह के रूप में बदल गया है। यीशु बाहर जाते हैं और फर वृक्ष की एक डाल तोड़कर उस परिवार को धन्यवाद कहते हुए देते हैं। तभी से प्रत्येक ईसाई परिवार अपने घर में फर की पत्तियों वाला क्रिसमस ट्री सजाता है।
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