वाराणसी के मशहूर शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का पुश्तैनी मकान इन दिनों राजनीतिक चर्चाओं और विवादों के केंद्र में है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि इस ऐतिहासिक धरोहर को बुलडोजर से ढहा दिया गया है, जिसे अब परिवार ने सिरे से नकार दिया है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए बीजेपी सरकार पर तीखे हमले किए थे। उन्होंने कहा था कि जिनके लिए शहनाई नहीं बजी, उनसे और क्या उम्मीद की जा सकती है? अखिलेश ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल कला और कलाकारों की विरासत को मिटाना चाहता है। उन्होंने वादा किया कि अगर उनकी सरकार बनी, तो वे उस्ताद की याद में एक श्रवण-संग्रहालय बनवाएंगे।
अखिलेश के दावों के बाद उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के पोते सिफ्तेन हुसैन और अफाक हैदर ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। परिवार ने बताया कि मकान पर किसी भी प्रकार की बुलडोजर कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिस संकरी गली में यह मकान स्थित है, वहां बुलडोजर का पहुंचना ही असंभव है।
परिवार के अनुसार, यह पुश्तैनी मकान काफी जर्जर हो चुका था। इसलिए, परिवार के सभी सदस्यों ने आपसी सहमति से इसे पुनर्निर्माण कराने का निर्णय लिया। परिवार का स्पष्ट कहना है कि यह कोई सरकारी या राजनीतिक कार्रवाई नहीं, बल्कि जर्जर इमारत को सुरक्षित रखने का उनका अपना प्रयास है।
इस पुनर्निर्माण के पीछे एक सम्मानजनक उद्देश्य भी है। परिवार की योजना के अनुसार, मकान के ग्राउंड फ्लोर को उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के लिए समर्पित एक म्यूजियम के तौर पर विकसित किया जाएगा। नीचे की मंजिल पर उनकी संगीत यात्रा, शहनाई और यादों को सहेजा जाएगा, जबकि पहली मंजिल पर परिवार का आवास रहेगा।
परिवार ने स्पष्ट किया है कि वे इस काम को खुद अपने संसाधनों से कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि सरकार या अखिलेश यादव इस महान विरासत को सहेजने के लिए आर्थिक या अन्य मदद देना चाहते हैं, तो उसका स्वागत किया जाएगा। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की विरासत केवल एक मकान नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे सुरक्षित रखना परिवार की पहली प्राथमिकता है।
*जिनके लिए शहनाई नहीं बजी, उनसे और क्या उम्मीद करना?
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) November 7, 2026
भाजपा और उनके संकीर्ण सोच के संगी-साथी ‘कला और कलाकारों’ के हमेशा ख़िलाफ़ रहते हैं क्योंकि इन पुरातनपंथी-रूढ़िवादियों की ये संकरी मानसिकता होती है कि रचनात्मक लोग ही समाज में परिवर्तन की भूमि और भूमिका बनाते हैं। सकारात्मक कला… pic.twitter.com/YlsIDYXuN9
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