ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर का पीएमजी स्क्वायर इन दिनों एक बेहद दर्दनाक और संवेदनशील प्रदर्शन का गवाह बना है। त्योहारों के बीच, जब लोग खुशियों में डूबे हैं, संविदा बिजली कर्मचारी अपनी नौकरी बचाने के लिए कफन ओढ़कर सड़कों पर उतरे हैं।
सड़कों पर अंतिम संस्कार का दृश्य ओडिशा विद्युत ठेका कर्मचारी मिलित मंच के बैनर तले सैकड़ों कर्मचारी खुद को जीवित लाश बताते हुए सफेद कफन ओढ़कर सड़क पर लेट गए। प्रदर्शनकारियों ने अपने सिर पर फूलों की माला भी पहन रखी है, जिससे वहां का दृश्य किसी अंतिम संस्कार जैसा प्रतीत हो रहा है।
38 दिन से जारी है आर-पार की लड़ाई यह अनूठा प्रदर्शन अब अपने 38वें दिन में प्रवेश कर चुका है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पिछले 5 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। मंच के अध्यक्ष दिलीप कुमार साहू का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद सरकार हमारी मांगों को अनसुना कर रही है, इसलिए हमें विरोध के इस कठिन रास्ते को चुनना पड़ा।
छंटनी का डर: आखिर क्या है मांग? कर्मचारियों का मुख्य आरोप है कि हर साल टेंडर बदलने के बहाने उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, राज्य में कुल 15,000 संविदा कर्मचारियों में से 2,000 को पहले ही काम से बाहर किया जा चुका है। उनकी मांग है कि मौजूदा कर्मचारियों को नई संविदा प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाए और निकाले गए साथियों को बिना शर्त वापस काम पर रखा जाए।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा बुरा असर लगातार 38 दिनों के इस संघर्ष का असर अब कर्मचारियों की सेहत पर दिखने लगा है। अब तक 12 से 15 कर्मचारी गंभीर रूप से बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। इसके बावजूद, सड़क पर डटे कर्मचारियों का हौसला कम नहीं हुआ है। उनका साफ कहना है कि जब तक सरकार बातचीत के लिए आगे नहीं आती और ठोस समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक यह आंदोलन और तेज होगा।
सरकार पर दबाव की स्थिति यह प्रदर्शन केवल नौकरी का मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के अस्तित्व का सवाल बन गया है। सर्दी और त्योहार के मौसम में सड़क पर प्रदर्शन करने को मजबूर इन कर्मचारियों का कहना है कि उनके पास अब खोने के लिए कुछ नहीं बचा है। अब देखना यह होगा कि सरकार कब तक इस मानवीय संकट पर संज्ञान लेती है।
#WATCH भुवनेश्वर (ओडिशा): ओडिशा विद्युत उपभोक्ता ओ थिका कर्मचारी मिलिटा मंच के अध्यक्ष दिलीप कुमार साहू ने कहा, हमारे हड़ताल को 38 दिन हो गए हैं। लेकिन हमारी बात कोई नहीं सुन रहा है तो इसलिए हम 38 दिन से प्रदर्शन नए-नए रूप में कर रहे हैं। हम 5 दिन से भूख हड़ताल कर रहे हैं। लेकिन… https://t.co/5JJD96ET7Apic.twitter.com/WtSzLUDGSD
— ANI_HindiNews (@AHindinews) November 8, 2026
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