गंदे मोजों में कैद थी मौत: पेरू एयरपोर्ट पर 3,000 जहरीली मकड़ियां बरामद
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तस्करी के हैरान कर देने वाले मामलों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। पेरू की राजधानी लीमा स्थित जॉर्ज शावेज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अधिकारियों ने एक ऐसी खेप पकड़ी जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया। सुरक्षा जांच के दौरान तीन यात्रियों के पास से करीब 3,000 जिंदा टारेंटुला मकड़ियां बरामद की गई हैं।

मोजों में छिपाया था खौफनाक सामान पकड़े गए यात्रियों ने तस्करी का बेहद अजीबोगरीब तरीका अपनाया था। सूटकेस के अंदर कपड़ों के बीच भारी मात्रा में गंदे मोजे रखे हुए थे। जब अधिकारियों ने इन मोजों की तलाशी ली, तो उनके अंदर प्लास्टिक के छोटे-छोटे डिब्बे मिले, जिनमें ये जहरीली मकड़ियां बंद थीं। हर सूटकेस में 15 से 22 तक मोजे छिपाए गए थे।

अमेजन के जंगलों से चुराई गईं मकड़ियां बरामद की गई खेप में टारेंटुला के अंडे, छोटे बच्चे और वयस्क मकड़ियां शामिल हैं। इनमें से कई प्रजातियां पेरू के अमेजन क्षेत्र में पाई जाती हैं, जो अपनी विशालकाय बनावट और जहर के लिए जानी जाती हैं। इन जीवों को अवैध रूप से जंगल से पकड़कर ले जाया जा रहा था, जो कि वन्यजीव संरक्षण कानूनों का सीधा उल्लंघन है।

पकड़े गए तीन विदेशी नागरिक इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो जर्मनी के और एक पोलैंड का नागरिक है। पेरू के सख्त वन्यजीव कानूनों के तहत, तस्करी के दोषी पाए जाने पर इन्हें 3 से 7 साल तक की जेल हो सकती है। फिलहाल तीनों हिरासत में हैं और उनसे पूछताछ की जा रही है।

यूरोप के बाजार में है मोटी कमाई जानकारों के मुताबिक, यूरोप में एक दुर्लभ टारेंटुला की कीमत करीब 500 यूरो (लगभग 50,000 रुपये) तक हो सकती है। इसे पालतू बनाने का शौक रखने वाले लोग और कलेक्टर इसके लिए भारी कीमत चुकाते हैं। इसी लालच में तस्कर इन बेजुबान जीवों की तस्करी करने का जोखिम उठाते हैं।

मकड़ियों का क्या होगा? फिलहाल सभी 3,000 मकड़ियों को पेरू के वन एवं वन्यजीव विभाग (SERFOR) की हिरासत में रखा गया है। अधिकारी इन प्रजातियों की पहचान कर रहे हैं और उनकी देखभाल कर रहे हैं। जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, इन सभी मकड़ियों को उनके प्राकृतिक आवास यानी जंगलों में वापस छोड़ दिया जाएगा।

तस्करी का नया चलन यह पहली बार नहीं है जब तस्करों ने मोजों का इस्तेमाल किया हो। इससे पहले अगस्त में जापान के टोक्यो एयरपोर्ट पर भी एक व्यक्ति को 200 छिपकलियां मोजों में छिपाकर ले जाते हुए पकड़ा गया था। यह घटना साफ करती है कि दुर्लभ वन्यजीवों की बढ़ती मांग तस्करों को तस्करी के नए और क्रूर तरीके ईजाद करने के लिए उकसा रही है।

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