भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने होरिजोन यूरोप (Horizon Europe) कार्यक्रम में भारत की भागीदारी के लिए बातचीत सफलतापूर्वक संपन्न कर ली है। यह रणनीतिक कदम दोनों पक्षों के बीच अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत है।
क्या है होराइजन यूरोप? होरिजोन यूरोप, यूरोपीय संघ का सबसे बड़ा और प्रमुख अनुसंधान और नवाचार कार्यक्रम है। 2021-2027 की अवधि के लिए इसका कुल बजट लगभग 93.5 बिलियन यूरो है। यह कार्यक्रम जलवायु परिवर्तन, सतत विकास लक्ष्यों और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में वैश्विक समाधान खोजने पर केंद्रित है।
भारतीय शोधकर्ताओं और उद्योगों को सीधा फायदा इस जुड़ाव से भारतीय शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों को बड़ा लाभ मिलेगा। उन्हें न केवल यूरोपीय संघ के रिसर्च फंड तक पहुंच प्राप्त होगी, बल्कि वे यूरोपीय शोध समूहों और वहां की विश्व-स्तरीय प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर काम कर सकेंगे। इससे प्रतिभाओं का आदान-प्रदान (mobility) बढ़ेगा और संयुक्त रूप से महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास संभव होगा।
भारत की प्राथमिकताओं से मेल होरिजोन यूरोप के पिलर II (Pillar II) के तहत स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, अंतरिक्ष, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। ये सभी क्षेत्र विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन विषयों पर सहयोग से भारत की वैज्ञानिक क्षमताएं और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Innovation Ecosystem) और अधिक मजबूत होगा।
कैसे हुई बातचीत की शुरुआत? इस बड़े समझौते की नींव 27 जनवरी, 2026 को हुए भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में पड़ी थी। इसके बाद, 15 जुलाई, 2026 को ब्रुसेल्स में भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक के दौरान औपचारिक चर्चा शुरू हुई थी। अब बातचीत पूरी होने के साथ ही दोनों पक्षों ने भविष्य के सहयोग का रास्ता साफ कर दिया है।
एक रणनीतिक साझेदारी यह जुड़ाव केवल एक समझौता नहीं, बल्कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय साख का प्रतीक है। आने वाले समय में, यह साझेदारी साझा चुनौतियों का मुकाबला करने और वैश्विक स्तर पर नई वैज्ञानिक क्रांतियां लाने में उत्प्रेरक का काम करेगी।
Negotiations for India’s association to Horizon Europe have concluded!
— Horizon Europe (@HorizonEU) November 6, 2026
This will open new opportunities for researchers and innovators in the EU and India to work together more closely, develop new technologies and help address shared challenges.
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