फ्रांस में जारी तनाव के बीच हैकर्स ने एक खतरनाक साजिश को अंजाम देने की कोशिश की है। साइबर हमलावरों ने देश के सरकारी ब्लड बैंक के कूलिंग सिस्टम को निशाना बनाया। उनका मकसद फ्रीजर का तापमान माइनस 30 डिग्री सेल्सियस से बढ़ाकर 110 डिग्री सेल्सियस तक करना था, जिससे पूरा ब्लड स्टॉक उबलकर नष्ट हो जाए।
अलार्म सिस्टम बना रक्षक हैकरों ने ब्लड स्टोरेज सिस्टम में घुसपैठ के लिए बेहद कमजोर डिफॉल्ट पासवर्ड का इस्तेमाल किया। फ्रीजर का तापमान तेजी से बढ़ने लगा था, लेकिन गनीमत रही कि समय रहते निगरानी और अलार्म सिस्टम ने खतरे को भांप लिया।
ऑन-कॉल टेक्नीशियन को तापमान में हुई इस असामान्य हलचल की तुरंत जानकारी मिली। इससे पहले कि खून और प्लाज्मा के नमूने उबलकर खराब होते, कर्मचारियों ने तुरंत एक्शन लिया और ब्लड स्टॉक को सुरक्षित दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया। इस घटना से ब्लड सप्लाई पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है।
क्या है EFS और इसकी अहमियत? फ्रेंच ब्लड एस्टैब्लिशमेंट (EFS) फ्रांस की आधिकारिक सरकारी रक्त सेवा है। यह संस्था देश भर के 1,900 से अधिक अस्पतालों को रक्त, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स की आपूर्ति करती है। यदि यह हमला सफल होता, तो फ्रांस की स्वास्थ्य व्यवस्था भीषण संकट में पड़ सकती थी।
सुपरमार्केट के बाद ब्लड बैंक: हैकरों का नया जाल यह हमला कोई इकलौती घटना नहीं है। इससे पहले फ्रांस के सैकड़ों सुपरमार्केट में रखे रेफ्रिजरेटरों को भी इसी तरह निशाना बनाया गया था। सरकारी साइबर सुरक्षा एजेंसी (CERT-FR) ने अक्टूबर में ही चेतावनी जारी की थी कि इंटरनेट से जुड़े इन उपकरणों में सुरक्षा खामियां हैं।
ज्यादातर मामलों में हैकर्स उन डिवाइसेज को निशाना बना रहे हैं जिनमें कंपनी द्वारा दिए गए डिफॉल्ट पासवर्ड को बदला नहीं गया था।
रूस समर्थित समूहों पर शक की सुई यूरोप में हो रहे इन लगातार साइबर हमलों के पीछे किसका हाथ है, जांच जारी है। हालांकि, विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों का शक रूस समर्थित हैकर समूहों नोनेम057(16) और जेड-पेंटेस्ट अलायंस पर गहरा रहा है। इन समूहों ने हाल ही में डैनफॉस कंपनी की तकनीक को हैक करने का दावा किया था, जिसके उपकरण इन फ्रीजर्स में इस्तेमाल होते हैं।
🚨 BREAKING: The fridge-hack wave went after France s blood supply freezers, and set them from -30 °C to 110 °C.
— International Cyber Digest (@IntCyberDigest) November 4, 2026
They hit Coolworld, a contractor for blood service EFS. An on-call technician spotted the rise.
The Health Ministry says there was no operational impact. pic.twitter.com/6AgHDNdvJK
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