पुणे को मिलेगा महाराष्ट्र का सबसे बड़ा ट्रांसपोर्ट हब, 825 करोड़ रुपये में बदलेगी शिवाजीनगर बस स्टैंड की तस्वीर
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पुणे के शिवाजीनगर एसटी बस स्टैंड का अब कायाकल्प होने जा रहा है। इसे 825 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यह भविष्य में महाराष्ट्र का अपनी तरह का सबसे बड़ा बस टर्मिनल होगा।

एमओयू पर हस्ताक्षर और योजना बुधवार को मुंबई के सह्याद्री गेस्ट हाउस में महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) और महा मेट्रो के बीच इस परियोजना के लिए एमओयू (MoU) साइन किया गया। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद रहे। परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर तैयार किया जाएगा।

क्या-क्या मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं? प्रस्तावित हब यात्रियों के अनुभव को पूरी तरह बदल देगा। यहाँ विश्वस्तरीय वेटिंग एरिया, बसों के लिए बहुमंजिला पार्किंग और रखरखाव के लिए विशेष वर्कशॉप बनाई जाएगी। साथ ही, कमर्शियल स्पेस भी विकसित किया जाएगा ताकि यात्री सुविधाओं के साथ खरीदारी भी कर सकें।

कनेक्टिविटी का महा-संगम यह प्रोजेक्ट केवल बस स्टैंड नहीं, बल्कि एक इंटीग्रेटेड हब होगा। यहाँ से पुणे मेट्रो, रेलवे स्टेशन, PMPML की बसें और ऑटो-रिक्शा एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगे। इससे रोजाना एक लाख से अधिक यात्रियों का सफर आसान होगा, जो मुंबई, खानदेश, मराठवाड़ा और विदर्भ के बीच यात्रा करते हैं।

अगले 3-4 साल में पूरा होगा काम परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया अगले महीने शुरू होने की उम्मीद है। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इसे अगले 3 से 4 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। शिवाजीनगर के विधायक सिद्धार्थ शिरोले ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों की मेहनत अब रंग ला रही है।


दिल्ली-NCR का दम घुट रहा, लेकिन प्रदूषण के मूल कारणों का पता नहीं!

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर खतरनाक बना हुआ है, लेकिन इसे कम करने के सरकारी दावे कागजों तक ही सीमित हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत एनसीआर के चार प्रमुख शहरों में प्रदूषण के मुख्य स्रोतों की पहचान करने का काम एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अधूरा है।

सालों से जारी है रिपोर्ट का इंतज़ार प्रदूषण फैलाने वाले कारकों (Source Apportionment Study) की वैज्ञानिक रिपोर्ट समय पर न आने से सटीक नीति बनाने में बाधा आ रही है। सर्दियों की दस्तक के साथ ही हवा जहरीली हो रही है, लेकिन प्रशासन अभी भी डेटा जुटाने की प्रक्रिया में ही फंसा हुआ है। बिना ठोस आंकड़ों के प्रदूषण पर काबू पाना भविष्य में एक बड़ी चुनौती साबित होगा।

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