पंचकूला स्कूल कांड: मौत को मात देकर घर लौटी 6 साल की मासूम, फूलों से हुआ स्वागत
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ठीक होकर लौटी नन्हीं जान पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित सरकारी स्कूल में बर्बर हमले का शिकार हुई 6 साल की मासूम बच्ची अब ठीक होकर अपने घर लौट आई है। पीजीआई चंडीगढ़ में कई दिनों तक चले इलाज के बाद जब वह घर पहुंची, तो परिजनों ने फूल-मालाओं और उपहारों के साथ उसका भव्य स्वागत किया। पिता अपनी बेटी को सुरक्षित पाकर भावुक हो गए।

खौफ में बच्ची का बचपन भले ही बच्ची शारीरिक रूप से स्वस्थ हो गई है, लेकिन मानसिक घाव अभी भी गहरे हैं। मां ने बताया कि बेटी घटना के बाद से काफी डरी हुई है। वह अक्सर रात को अचानक नींद से जाग जाती है और घबराकर रोने लगती है। इस खौफनाक घटना ने पूरे परिवार को अंदर से झकझोर कर रख दिया है।

क्या था मामला? यह रूह कंपा देने वाली घटना 29 अक्तूबर को हुई थी। स्कूल में तीसरी कक्षा के एक छात्र ने 6 साल की बच्ची पर ईंट से हमला किया और उसे कई बार बेंच पर पटका था। सीसीटीवी में कैद हुई इस दरिंदगी ने पूरे देश को झकझोर दिया था। गंभीर रूप से घायल बच्ची को इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया था।

आरोपी छात्र की ब्रेन मैपिंग रिपोर्ट तैयार हमला करने वाले नाबालिग छात्र की मानसिक स्थिति का पता लगाने के लिए जीएमसीएच-32 में उसका परीक्षण किया गया। डॉक्टरों के पैनल ने उसकी मानसिक अवस्था और व्यवहार का आकलन किया है। पुलिस बुधवार को यह रिपोर्ट जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJ Board) को सौंपेगी, जिसके बाद यह तय होगा कि बच्चे को जुवेनाइल होम में रखा जाए या परिजनों को सौंपा जाए। रिपोर्ट में बच्चे की मानसिक हालत ठीक न होने के संकेत मिले हैं।

स्कूल प्रशासन पर कड़ी कार्रवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने स्कूल की प्रिंसिपल और दो शिक्षिकाओं को निलंबित कर दिया है। घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है, साथ ही स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। परिवार अब जांच कमेटी की फाइनल रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।

महिला आयोग ने जताई चिंता हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन उषा प्रियदर्शनी ने इस घटना को समाज के लिए खतरे की घंटी बताया है। उन्होंने बच्चों द्वारा देखी जाने वाली हिंसक सोशल मीडिया सामग्री और ऑनलाइन गेमिंग के दुष्प्रभावों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने जोर दिया कि स्कूलों में बच्चों की काउंसलिंग और नैतिक शिक्षा को अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों के बदलते व्यवहार को समय रहते समझा जा सके।

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