दीया मिर्जा का वीडियो: प्रदूषण पर संदेश या धर्म का एजेंडा? रोहित पवार ने बीजेपी को घेरा
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मुंबई: दिवाली के दौरान पटाखे न जलाने के संदेश वाले अभिनेत्री दीया मिर्जा के एक वीडियो ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा इस वीडियो को बीएमसी के सोशल मीडिया हैंडल पर फिर से अपलोड करने के आदेश के बाद, एनसीपी (शरद पवार गुट) ने सत्तारूढ़ बीजेपी पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं।

विवाद की जड़: कब और क्यों हटा वीडियो? यह पूरा मामला बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) द्वारा दीया मिर्जा के साथ मिलकर तैयार किए गए एक जागरूकता वीडियो से जुड़ा है। इसमें अभिनेत्री ने पर्यावरण की सुरक्षा के लिए पटाखे न जलाने की अपील की थी। बीजेपी विधायक अमीत सातम ने इसे हिंदू विरोधी करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसके दबाव में बीएमसी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वह वीडियो हटा लिया था।

रोहित पवार का सीधा हमला एनसीपी विधायक रोहित पवार ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए बीजेपी पर गंदी राजनीति का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दीया मिर्जा, माधुरी दीक्षित और अन्य हस्तियों के संदेश मूलतः पर्यावरण सुरक्षा के लिए हैं। रोहित पवार ने सवाल उठाया कि पर्यावरण बचाने की बात करने में धर्म कहां से आ गया? उन्होंने आरोप लगाया कि अमीत सातम ने सिर्फ अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए इस संदेश को तोड़-मरोड़ कर पेश किया।

सीएम की चुप्पी पर सवाल इस मामले को लेकर रोहित पवार ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के रवैये पर भी नाराजगी जताई। पवार का कहना है कि जब मुख्यमंत्री से इस विवाद पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह बीएमसी का मामला है। पवार के अनुसार, सरकार के मुखिया को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए, न कि मामले को टालना चाहिए।

हाई कोर्ट का कड़ा रुख बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए बीएमसी के कदम को गलत माना है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि वीडियो का उद्देश्य प्रदूषण कम करने के प्रति जनता को जागरूक करना था, जो राज्य और नागरिकों के हित में है। कोर्ट ने बीएमसी को आदेश दिया है कि वह इस वीडियो को अपनी आधिकारिक वेबसाइट और सभी सोशल मीडिया हैंडल पर तत्काल फिर से अपलोड करे।

राजनीति बनाम पर्यावरण फिलहाल, कोर्ट के इस आदेश ने बीजेपी के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है। जहां एक ओर विपक्ष इसे धर्म के नाम पर राजनीति बता रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। देखना यह होगा कि कोर्ट के आदेश के बाद क्या बीएमसी विवाद को पूरी तरह खत्म करती है या यह मुद्दा आगामी दिनों में और तूल पकड़ेगा।

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