भारत के पूर्वी तट पर कुदरत की दोहरी मार का खतरा मंडरा रहा है। साइक्लोन अर्नब के बाद अब मुरासु चक्रवात तेजी से आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है। 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाएं और भारी बारिश का अंदेशा है। एक सप्ताह के भीतर बैक-टू-बैक दो तूफानों ने तटीय राज्यों की तैयारियों की परीक्षा लेनी शुरू कर दी है।
हाइ-टेक रडार से मिल रही पल-पल की जानकारी भारत का मौसम विभाग (IMD) इस बार पूरी तरह मुस्तैद है। चेन्नई, विशाखापट्टनम, कोलकाता और पारादीप समेत पूर्वी तट पर 8 डॉप्लर वेदर रडार का नेटवर्क काम कर रहा है। ये रडार सैटेलाइट और ऑटोमैटिक वेदर स्टेशनों के साथ मिलकर तूफान की दिशा और तीव्रता पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं, ताकि समय रहते सटीक चेतावनी जारी की जा सके।
आंध्र प्रदेश का साइक्लोन इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम आंध्र प्रदेश सरकार ने एक विशेष डिजिटल डैशबोर्ड तैयार किया है। यह साइक्लोन इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम तूफान के संभावित रास्तों के साथ-साथ उन इलाकों की पहचान करता है जो सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। अस्पताल, स्कूल, शेल्टर और पावर ग्रिड जैसे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मैप कर लिया गया है ताकि आपात स्थिति में फौरन मदद पहुंचाई जा सके।
ओडिशा का साइक्लोन अर्ली वॉर्निंग सिस्टम ओडिशा के पास एक बेमिसाल अर्ली वॉर्निंग डिसेमिनेशन सिस्टम (EWDS) है। यह सैटेलाइट और डिजिटल रेडियो के जरिए सीधे तटीय गांवों तक अलर्ट भेजता है। 122 अलर्ट टावर और 1,200 से अधिक गांवों का नेटवर्क तब भी काम करता है जब मोबाइल नेटवर्क ठप हो जाते हैं। साथ ही, ओडीआरएएफ (ODRAF) की टीमें 24 घंटे अलर्ट मोड पर हैं।
तमिलनाडु में ड्रेनेज पर फोकस चेन्नई जैसे निचले इलाकों में भारी जलभराव से बचने के लिए प्रशासन ने स्टॉर्मवॉटर ड्रेनेज नेटवर्क को दुरुस्त किया है। यहां नालों की सफाई और डीसिल्टिंग का काम युद्धस्तर पर जारी है। चेन्नई, कराईकल और श्रीहरिकोटा के रडार सेंटर तूफान के हर बदलाव पर नजर बनाए हुए हैं ताकि शहर को जलमग्न होने से बचाया जा सके।
करोड़ों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचा आजादी के बाद से भारत ने आपदा प्रबंधन में लंबी छलांग लगाई है। नेशनल साइक्लोन रिस्क मिटिगेशन प्रोजेक्ट (NCRMP) के तहत सरकार ने करीब 4,300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। इसमें मल्टीपर्पस साइक्लोन शेल्टर, निकासी के लिए सड़कें, मजबूत पुल और अंडरग्राउंड इलेक्ट्रिकल केबलिंग का जाल बिछाया गया है। यह वही सुरक्षा कवच है, जिस पर आज करोड़ों लोगों की जिंदगी टिकी है।
*The #Severe_Cyclonic_Storm “#Murasu” [Pronunciation: Murasu]” over Westcentral & adjoining Southwest Bay of #Bengal moved west-northwestwards with a speed of 22 kmph during past 06 hours and lay centered at 0830 hours IST of today, the 02nd #November, 2026 over the Westcentral… pic.twitter.com/cPnRsu6hqc
— India Meteorological Department (@Indiametdept) November 2, 2026
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