बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर हुए हालिया चुनाव के नतीजे एनडीए की आंतरिक एकता पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। चुनाव में मिली हार के बाद जेडीयू और बीजेपी के बीच सियासी खींचतान तेज हो गई है। जेडीयू के प्रत्याशी ने पार्टी के भीतर ही चक्रव्यूह रचे जाने का गंभीर आरोप लगाया है।
चुनाव में एनडीए को चार सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, जिनमें से तीन सीटें जेडीयू के खाते की थीं। कुल आठ सीटों के नतीजों में बीजेपी को तीन, जेडीयू को एक, आरजेडी को एक और जनसुराज को एक सीट मिली। वहीं, दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मार ली। कांग्रेस इस चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल पाई।
चुनाव के बाद सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन दो निर्दलीय उम्मीदवारों—बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज—ने बीजेपी को समर्थन देने का एलान कर दिया, जिन्होंने चुनाव में जेडीयू के उम्मीदवारों को ही मात दी थी। ये दोनों पहले बीजेपी से जुड़े थे, लेकिन टिकट न मिलने पर बागी होकर मैदान में उतरे थे। अब जीत के बाद सीधे बीजेपी के साथ आने से सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह महज संयोग है या बीजेपी की सोची-समझी रणनीति?
तिरहुत स्नातक सीट से चुनाव हारने वाले जेडीयू के अभिषेक झा का दर्द सोशल मीडिया पर छलक उठा। उन्होंने सीधे तौर पर एनडीए के भीतर रचे गए चक्रव्यूह का जिक्र करते हुए खुद को अभिमन्यु बताया है। उनकी इस टिप्पणी को एनडीए के भीतर जेडीयू को कमजोर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
विपक्ष ने इस मौके का फायदा उठाते हुए बीजेपी पर निशाना साधा है। जनसुराज और कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी चुन-चुन कर जेडीयू के उम्मीदवारों को हराने के लिए अपने बागियों का इस्तेमाल करती है। कांग्रेस प्रवक्ता असीत नाथ तिवारी ने दावा किया कि बीजेपी वही पुरानी रणनीति अपना रही है जो उसने पहले चिराग पासवान के जरिए अपनाई थी।
इन दो निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से बीजेपी की ताकत विधान परिषद में 26 तक पहुंच गई है, जबकि जेडीयू 20 सदस्यों के साथ काफी पीछे रह गई है। संख्या बल में इस बढ़त ने बीजेपी को बिहार की राजनीति में और अधिक आक्रामक बना दिया है। एनडीए के भीतर की यह कोल्ड वर आने वाले दिनों में गठबंधन के भविष्य के लिए बड़े संकेत दे रही है।
तिरहुत के मेरे अपने स्नातक भाई-बहनों, साथियों और शुभचिंतकों,
— Abhishek Jha (@AbhishekJhaNITP) October 30, 2026
सबसे पहले तो आप तक अपनी बात पहुँचाने में हुई इस देरी के लिए मैं हृदय से क्षमा प्रार्थी हूँ। चुनाव के परिणाम भले ही मेरे पक्ष में नहीं आए, लेकिन इन बीते दिनों में आपने मुझे जो स्नेह, विश्वास और अपनापन दिया है, सच कहूँ तो… pic.twitter.com/fI8NvIq7iu
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