BS-4 से सीधे BS-6 का सफर: भारत ने आखिर क्यों छोड़ा BS-5? जानें क्या है पूरा मामला
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दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच सरकार ने एक बार फिर सख्त कदम उठाए हैं। 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली में BS-6 से नीचे के पेट्रोल-डीजल वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। इस प्रतिबंध के बीच अक्सर यह सवाल उठता है कि भारत ने बीच का चरण यानी BS-5 को क्यों छोड़ दिया और सीधे BS-4 से BS-6 पर छलांग क्यों लगाई?

क्या हैं BS मानक?

भारत स्टेज (BS) मानक, वाहनों से निकलने वाले धुएं और हानिकारक प्रदूषकों की मात्रा तय करने वाले नियम हैं। इनमें कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कणीय पदार्थ (Particulate Matter) जैसे घातक तत्व शामिल होते हैं। ये मानक केवल इंजन तक सीमित नहीं होते, बल्कि इनके लिए ईंधन की गुणवत्ता में भी सुधार करना पड़ता है।

क्यों सीधे BS-6 पर आया भारत?

भारत ने BS-5 को देशभर में लागू न करने का फैसला मुख्य रूप से समय और संसाधनों की बर्बादी से बचने के लिए लिया था। यदि सरकार पहले BS-5 लागू करती, तो वाहन कंपनियों और तेल रिफाइनरियों को दो बार बड़े तकनीकी बदलाव करने पड़ते। सीधे BS-6 अपनाना अधिक व्यावहारिक और प्रभावी था।

साथ ही, इसका मकसद प्रदूषण के स्तर को तेजी से कम करना था। BS-6 मानक, BS-4 की तुलना में काफी सख्त हैं, खासकर डीजल वाहनों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड को नियंत्रित करने में ये अधिक सक्षम हैं।

ईंधन की गुणवत्ता में बड़ा बदलाव

BS-6 केवल इंजन में सुधार नहीं है, बल्कि इसके लिए ईंधन में सल्फर की मात्रा को काफी कम करना पड़ा। तेल कंपनियों को अपनी रिफाइनरियों को इस स्तर पर अपग्रेड करना पड़ा कि वे उच्च गुणवत्ता वाला ईंधन सप्लाई कर सकें। यह एक बड़ा ढांचागत बदलाव था, जिसे बीच के किसी छोटे कदम (BS-5) से हासिल करना मुश्किल होता।

दिल्ली में क्यों लग रही है रोक?

सर्दियों के दौरान दिल्ली की हवा जहरीली हो जाती है। पराली, धूल और निर्माण गतिविधियों के साथ-साथ वाहनों का धुआं स्थिति को और बिगाड़ देता है। इसलिए, सर्दियों के विशेष महीनों में पुराने मानकों वाली गाड़ियों पर रोक लगाकर उत्सर्जन को नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है।

वाहन मालिक क्या करें?

अगर आप दिल्ली जाने की योजना बना रहे हैं, तो अपनी गाड़ी की रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) जरूर जांचें। केवल गाड़ी का मॉडल वर्ष देखकर यह अनुमान न लगाएं कि वह BS-6 है या नहीं, क्योंकि एक ही मॉडल अलग-अलग समय पर अलग-अलग मानकों के साथ बेचे गए हैं।

याद रखें, केवल वाहन प्रतिबंध ही प्रदूषण का एकमात्र समाधान नहीं है, लेकिन यह उस बड़ी कवायद का एक अहम हिस्सा है जिसके जरिए सरकार भविष्य की स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है। यात्रा शुरू करने से पहले नवीनतम सरकारी अधिसूचना जरूर देख लें।

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