वोट चोरी के आरोपों पर अमित शाह की राहुल-अखिलेश को खुली चुनौती: कहा- संसद में आएं, चर्चा के लिए तैयार हैं
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष द्वारा लगाए गए वोट चोरी के आरोपों पर राहुल गांधी और अखिलेश यादव को सीधी चुनौती दी है। लखनऊ में आयोजित पार्टी की बैठक में शाह ने स्पष्ट किया कि भाजपा इन आरोपों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन उन्हें संदेह है कि विपक्ष सदन में आने की हिम्मत दिखा पाएगा।

संसद बनाम सड़क: अमित शाह का तंज अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को राहुल बाबा कहकर संबोधित करते हुए कहा कि विपक्ष का मकसद चर्चा करना नहीं, बल्कि सड़कों पर हंगामा खड़ा करना है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष संसद के भीतर अपनी बात रखने के बजाय राजनीतिक माहौल बनाने के लिए सड़कों पर प्रदर्शन करना पसंद करता है।

क्रिकेट का उदाहरण देकर घेरा गृह मंत्री ने विपक्ष के व्यवहार की तुलना एक ऐसी क्रिकेट टीम से की, जो मैच हारने के बाद अंपायर पर ही सवाल उठाना शुरू कर देती है। शाह के अनुसार, विपक्ष चुनाव में अपनी करारी हार को स्वीकार करने के बजाय चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बेबुनियाद सवाल उठाकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है।

चुनाव आयोग और एसआईआर पर विवाद विपक्ष का मुख्य विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए चुनिंदा मतदाताओं के नाम हटाकर भाजपा को लाभ पहुंचाया जा रहा है। इसी के विरोध में विपक्ष ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली और प्रदर्शन की योजना बनाई है।

अखिलेश-राहुल के ट्रैक रिकॉर्ड पर हमला अमित शाह ने अपने संबोधन में सपा और कांग्रेस के चुनावी इतिहास पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भाजपा ने जीत हासिल की है, जबकि राहुल गांधी और अखिलेश यादव लंबे समय से अपनी पार्टियों को अपने दम पर सत्ता तक नहीं ले जा पाए हैं। शाह ने तंज कसा कि अखिलेश के पास भी मुलायम सिंह यादव के दौर के बाद से जीत का कोई ठोस ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है।

आगामी सियासी हलचल फिलहाल वोट चोरी का यह मुद्दा गंभीर मोड़ ले चुका है। एक तरफ विपक्ष जनता की अदालत के जरिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को घेरने की तैयारी में है, वहीं अमित शाह ने संसद के विशेष सत्र का दांव खेलकर गेंद विपक्ष के पाले में डाल दी है। अब देखना यह है कि क्या राहुल गांधी और अखिलेश यादव संसद में आकर इन आरोपों पर बहस की चुनौती स्वीकार करेंगे या विरोध प्रदर्शन का रास्ता ही चुनेंगे।

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