जिनपिंग का मास्टरस्ट्रोक : सेना के उस अफसर को सौंपी कमान, जिससे कांपते हैं बड़े-बड़े जनरल
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी सत्ता और सेना पर पकड़ मजबूत करने के लिए एक बड़ा दांव खेला है। उन्होंने जनरल झांग शेंगमिन को कम्युनिस्ट पार्टी की सबसे शक्तिशाली इकाई पोलित ब्यूरो में शामिल कर दिया है। यह नियुक्ति सामान्य प्रक्रिया से हटकर है, क्योंकि इसके लिए 2027 की पार्टी कांग्रेस का इंतजार नहीं किया गया।

कौन हैं झांग शेंगमिन? झांग शेंगमिन का नाम सुनते ही चीनी सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी सतर्क हो जाते हैं। 1958 में जन्मे झांग की पहचान एक सख्त अनुशासन अधिकारी के रूप में रही है। 2017 में जब उन्हें केंद्रीय सैन्य आयोग के अनुशासन निरीक्षण आयोग की कमान मिली, तो उन्होंने सेना के भीतर भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाया। उन्हें शी जिनपिंग का सबसे विश्वस्त सिपाही माना जाता है।

सेना में हुई बड़ी साफ-सफाई चीन की सेना (PLA) में इन दिनों भारी उथल-पुथल चल रही है। केंद्रीय सैन्य आयोग के सात सदस्यों में से अब पांच को पद से हटाया जा चुका है। स्थिति यह है कि आयोग में अब केवल राष्ट्रपति शी जिनपिंग और झांग शेंगमिन ही मुख्य रूप से बचे हैं। इस बड़े फेरबदल के बाद झांग सेना के भीतर सबसे प्रभावशाली और ताकतवर अधिकारी बनकर उभरे हैं।

2027 से पहले जिनपिंग का संदेह और संदेश पोलित ब्यूरो में झांग की नियुक्ति महज एक पदोन्नति नहीं, बल्कि एक राजनीतिक मैसेज है। आमतौर पर पोलित ब्यूरो के सदस्यों का चुनाव पार्टी कांग्रेस में होता है, जो 2027 में होनी है। लेकिन जिनपिंग ने समय से पहले यह फैसला लेकर यह साफ कर दिया है कि वे अपनी नीतियों को लागू करने के लिए किसी भी औपचारिकता के मोहताज नहीं हैं।

अब आगे क्या? इस फैसले के साथ ही झांग की ताकत अब केवल सेना तक सीमित नहीं रहेगी। अब पार्टी के सर्वोच्च नीतिगत फैसलों में भी उनकी सीधी भागीदारी होगी। हालांकि, सेना के शीर्ष जनरलों को बाहर का रास्ता दिखाने और अपने वफादार को सत्ता के केंद्र में बैठाने के इस कदम को विशेषज्ञ चीन की भविष्य की सैन्य और राजनीतिक रणनीति के लिए काफी संवेदनशील मान रहे हैं।

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