LAC पर प्रोपेगेंडा की जंग: भारत को बदनाम करने के लिए पाकिस्तान ने फैलाया फेक वीडियो का जाल
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अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच तनाव की खबरों के बाद सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार का दौर शुरू हो गया है। पाकिस्तान से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल लगातार ऐसे वीडियो वायरल कर रहे हैं, जिनमें दावा किया गया है कि चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों को बंधक बना लिया है या उन्हें बुरी तरह पीटा है।

सेना ने खोली पोल भारतीय सेना ने लगातार ऐसे दावों का फैक्ट चेक करके इन्हें सिरे से खारिज किया है। सेना का कहना है कि ये वीडियो पूरी तरह फर्जी हैं और इनका भारतीय सेना के साथ कोई लेना-देना नहीं है। इन वीडियो के जरिए एक ऐसा नैरेटिव बनाने की कोशिश की जा रही है कि चीन भारत पर हावी है, जबकि वास्तविकता इससे कोसों दूर है।

पाकिस्तान का डिजिटल एजेंडा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और पाकिस्तान की गहरी दोस्ती जगजाहिर है। चीन अक्सर छद्म तरीके से अफवाहें फैलाने के लिए पाकिस्तान के सोशल मीडिया इकोसिस्टम का इस्तेमाल करता है। फैक्ट चेक टीम ने उन कई सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान की है जो पाकिस्तान से संचालित हो रहे हैं और भारत विरोधी दुष्प्रचार फैला रहे हैं।

पुराने वीडियो का गलत इस्तेमाल दुष्प्रचार फैलाने वाले गिरोह पुराने वीडियो को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया का एक पुराना वीडियो वायरल किया गया, जिसमें दावा किया गया कि चीन ने अरुणाचल के कई इलाकों पर कब्जा कर लिया है। सच्चाई यह है कि वह वीडियो मेजर जनरल कालिया द्वारा घुसपैठ को नाकाम करने के बारे में दी गई जानकारी का था, जिसे गलत संदर्भ में पेश किया गया।

गोलीबारी की खबरें कोरी अफवाह सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो में भारत-चीन सीमा पर गोलीबारी के फुटेज दिखाए जा रहे हैं। आईटीबीपी (ITBP) ने स्पष्ट पुष्टि की है कि एलएसी पर फायरिंग जैसी कोई घटना नहीं हुई है। इसी तरह, नाथु ला दर्रे के पास चीन की गाड़ियों के दिखने वाले वीडियो को भी सेना ने सामान्य व्यापारिक आवाजाही बताया है, जिसे गलत तरीके से चीनी घुसपैठ के रूप में पेश किया जा रहा है।

सरकार की चेतावनी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भी नागरिकों को इस तरह के सोशल मीडिया अभियानों के प्रति सचेत रहने की सलाह दी है। सरकार का कहना है कि दुश्मन देश भारत की आंतरिक सुरक्षा और मनोबल को कमजोर करने के लिए इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर (सूचना युद्ध) का सहारा ले रहे हैं। लोगों से अपील की गई है कि किसी भी संवेदनशील वीडियो को बिना आधिकारिक पुष्टि के साझा न करें।

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