संयुक्त राष्ट्र में भारत की दो-टूक: 80 साल पुरानी व्यवस्था से नहीं चलेगा काम, वीटो पॉवर पर उठाए सवाल
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की मांग को लेकर भारत ने एक बार फिर अपना आक्रामक और स्पष्ट रुख अपनाया है। भारत ने दो टूक कहा है कि दुनिया की सबसे बड़ी सुरक्षा संस्था को अब 80 साल पुराने समीकरणों के आधार पर नहीं, बल्कि आज की वैश्विक वास्तविकताओं के हिसाब से चलना चाहिए।

वीटो पॉवर: लोकतांत्रिक प्रक्रिया के आड़े आती रुकावट

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतानेनी हरीश ने वीटो के अधिकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जब कुछ चुनिंदा देशों के पास किसी भी फैसले को रोकने की विशेष शक्ति है, तो फिर सुरक्षा परिषद को वास्तव में लोकतांत्रिक और प्रभावी कैसे बनाया जा सकता है? भारत का मानना है कि वीटो का मनमाना इस्तेमाल वैश्विक शांति के प्रयासों को कमजोर करता है।

केवल चर्चा काफी नहीं, अब चाहिए लिखित समाधान

राजदूत हरीश ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद में सुधार केवल कागजी चर्चा तक सीमित नहीं रहने चाहिए। भारत ने मांग की है कि सुधारों को लेकर एक स्पष्ट समय-सीमा तय की जानी चाहिए। उन्होंने टेक्स्ट-बेस्ड नेगोशिएशंस (लिखित प्रस्तावों पर बातचीत) को जल्द से जल्द शुरू करने पर जोर दिया है, क्योंकि यही इस संस्था की सबसे विश्वसनीय और लोकतांत्रिक प्रक्रिया है।

फैसले रोकने के छिपे हुए तरीके

हरीश ने एक अहम मुद्दे की ओर इशारा करते हुए कहा कि केवल वीटो ही एकमात्र बाधा नहीं है। सुरक्षा परिषद के कामकाज में कई ऐसी प्रक्रियाएं हैं—जैसे राष्ट्रपति के बयान, प्रेस रिलीज और प्रतिबंध समितियों के निर्णय—जिनके जरिए सदस्य किसी भी प्रस्ताव को दबा देते हैं। अक्सर, किसी एक सदस्य की असहमति के कारण महत्वपूर्ण फैसले ठंडे बस्ते में चले जाते हैं और इसकी कोई उचित वजह भी नहीं बताई जाती।

भारत का स्पष्ट विजन: समान अधिकार, समान जिम्मेदारी

भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जब तक वीटो का अधिकार मौजूद है, तब तक सुधारी गई परिषद के सभी स्थायी सदस्यों के पास यह समान अधिकार होना चाहिए। भारत ने किसी भी तरह की अलग-अलग श्रेणियों (categories) का विरोध करते हुए कहा कि इससे असमानता बढ़ेगी और सुधार की प्रक्रिया और भी जटिल हो जाएगी।

वैश्विक वास्तविकता और भविष्य की राह

भारत ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा परिषद का स्वरूप ऐसा होना चाहिए जो आज की दुनिया का प्रतिनिधित्व करे। भारत ने अफ्रीकी देशों की मांगों का भी समर्थन किया है। राजदूत हरीश ने विश्वास जताया कि यदि सभी सदस्य देश ईमानदारी से काम करें, तो सुरक्षा परिषद को एक निष्पक्ष और प्रभावी वैश्विक संस्था में बदलना संभव है। भारत इस दिशा में सहयोग के लिए पूरी तरह तैयार है।

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