नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मचे विवाद पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। आयोग ने एक विस्तृत हलफनामा दाखिल कर उन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है, जिनमें फैसलों को एकतरफा बताया गया था।
सर्वसम्मति से लिए गए सभी फैसले आयोग ने स्पष्ट किया कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए सभी SIR आदेश मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। आयोग ने कहा कि किसी फाइल के चलने के दौरान अधिकारियों द्वारा दी गई टिप्पणियों या सुझावों को अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए। फाइलों का निस्तारण एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत होता है, जिसमें अंतिम मंजूरी सामूहिक होती है।
कार्य आवंटन और विवादास्पद आदेश पर सफाई 28 जुलाई के कार्य आवंटन आदेश पर सफाई देते हुए आयोग ने कहा कि वह आदेश कभी लागू ही नहीं हुआ था। विवाद सामने आने के बाद, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा और 30 जुलाई को स्वयं संयुक्त निर्देश जारी किए। आयोग ने साफ किया कि अगर कोई अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम करता है, तो उसके विरुद्ध कार्रवाई का प्रावधान है।
फॉर्म-6 और मतदाता पंजीकरण में कोई बदलाव नहीं मतदाता फॉर्म-6 में संशोधन के दावों को आयोग ने गलत बताया है। आयोग के अनुसार, फॉर्म-6 में बदलाव का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। ऑनलाइन आवेदन में तकनीकी प्रदर्शन के कारण जो भ्रम पैदा हुआ था, उसे दूर करने के लिए 21 अक्टूबर से व्यवस्था बदली जा रही है। अब आवेदन में फॉर्म-6 और घोषणा पत्र को अलग-अलग दिखाया जाएगा, जैसा कि कागज पर होता है।
सुनवाई की प्रक्रिया हुई आसान मतदाताओं को राहत देते हुए आयोग ने कहा कि हर मामले में फिजिकल सुनवाई के लिए आने की जरूरत नहीं है। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर जाकर दस्तावेज ले सकते हैं। विशेष मामलों में ही सुनवाई की जाएगी, जिसमें भी ऑनलाइन सुनवाई को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से ERO के आदेशों के अधीन है, जिसकी निगरानी IIT और IISc के विशेषज्ञों की समिति कर रही है।
CEC की बर्खास्तगी पर आयोग का कड़ा रुख मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने कहा कि CEC को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को हटाने जितनी ही जटिल है। आयोग ने इस याचिका को केवल एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित और निराधार बताया। साथ ही, ईवीएम पर उठते सवालों को भी सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों का हवाला देकर पूरी तरह खारिज कर दिया।
क्या है मामला? यह हलफनामा राकेश कुमार सिंह द्वारा दायर उस याचिका के जवाब में आया है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर सवाल उठाए गए थे और SIR प्रक्रिया को अमान्य घोषित करने की मांग की गई थी। आयोग ने अपने हलफनामे के जरिए अपनी कार्यप्रणाली की पारदर्शिता और सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया का बचाव किया है।
The Election Commission of India filed an affidavit before the Supreme Court saying all three SIR orders issued in June 2025, October 2025 and May 2026 were unanimous decisions.
— ANI (@ANI) October 26, 2026
Affidavit filed on the petitions questioning the Chief Election Commissioner’s functioning.
The ECI… pic.twitter.com/OlwDepOu3F
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