क्या लैब में बना सोना गिरा देगा गोल्ड के दाम? विज्ञान की नई कीमियागरी से मची हलचल
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सदियों से जिसे महज जादुई कल्पना माना जाता था, उसे विज्ञान ने एक नई चुनौती के रूप में पेश किया है। सैन फ्रांसिस्को के स्टार्टअप मैराथन फ्यूजन ने दावा किया है कि उसने न्यूक्लियर फ्यूजन तकनीक के जरिए पारे (Mercury) को असली और स्थिर सोने में बदलने में सफलता हासिल की है।

क्या है मैराथन फ्यूजन का दावा?

कंपनी ने दावा किया है कि उन्होंने न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हुए मर्करी-198 को गोल्ड-197 में बदला है। इस प्रक्रिया में उन्होंने CERN (यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन) के पुराने रिकॉर्ड को 10 गुना बेहतर प्रदर्शन के साथ पीछे छोड़ने का दावा किया है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनके प्रयोग से कुल कितनी मात्रा में सोना तैयार हुआ है।

कैसे काम करती है यह टेक्नोलॉजी?

यह प्रक्रिया ड्यूटेरियम-ट्रिटियम फ्यूजन रिएक्शन पर आधारित है। इसमें पैदा होने वाले हाई-एनर्जी न्यूट्रॉन्स का उपयोग करके पारे के परमाणुओं को सोने के परमाणुओं में बदल दिया जाता है। भौतिक विज्ञान के नजरिए से यह संभव है, लेकिन इस प्रक्रिया से निकलने वाले रेडियोएक्टिव बाई-प्रोडक्ट्स और तकनीकी चुनौतियां अब भी बड़ी बाधा बनी हुई हैं।

क्या इससे सोने के दाम गिर जाएंगे?

मैराथन फ्यूजन का अनुमान है कि एक गीगावाट क्षमता वाला प्लांट सालाना लगभग दो टन सोना पैदा कर सकता है। वहीं, दुनिया भर की खदानों से सालाना 3,600 टन से अधिक सोना निकलता है। इस तुलना में लैब का उत्पादन अभी बहुत कम है।

इसके अलावा, इस प्रक्रिया से बने सोने को इस्तेमाल के योग्य बनाने के लिए 7 से 17 साल तक स्टोर करना पड़ सकता है ताकि इसकी रेडियोएक्टिविटी खत्म हो सके। इसलिए, व्यावसायिक स्तर पर सोने की कीमतों में गिरावट की बात करना अभी बहुत जल्दबाजी होगी।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में हालिया गिरावट का कारण लैब-मेड गोल्ड नहीं, बल्कि बाजार का अपना उतार-चढ़ाव है। इस साल जनवरी से सोने की कीमतों में 5.56% की गिरावट देखी गई है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

मल्टीकॉइन कैपिटल के तुषार जैन ने इसकी तुलना लैब-ग्रोन डायमंड्स (हीरे) से की है, जिसने हीरा उद्योग की कीमतों को प्रभावित किया है। हालांकि, सोने की बाजार में व्यापक स्वीकार्यता और इसकी स्टोरेज संबंधी जटिलताओं को देखते हुए, फिलहाल आम आदमी को बाजार में सोने के भाव अचानक टूटते हुए नजर नहीं आएंगे। फिलहाल के लिए, यह तकनीक केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि है, आर्थिक क्रांति अभी मील दूर है।

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