राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर नागपुर में आयोजित विजयादशमी उत्सव में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने देश की आंतरिक और बाह्य चुनौतियों पर बेबाक राय रखी। उन्होंने भारत की एकता को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताते हुए युवाओं को डिजिटल युग के खतरों के प्रति आगाह किया।
रिजीम चेंज का एजेंडा और विदेशी ताकतों का दखल मोहन भागवत ने रिजीम चेंज (सत्ता परिवर्तन) के नैरेटिव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने फ्रांस, बांग्लादेश, नेपाल और अल्बानिया का उदाहरण देते हुए कहा कि सिर्फ सरकारों के बदलने से हालात नहीं सुधरते। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी ताकतें भारत की व्यवस्था को अस्थिर कर अपनी पसंद के लोगों को सत्ता में बिठाना चाहती हैं, और दुर्भाग्य से कुछ स्थानीय नेता भी इस एजेंडे का हिस्सा बन रहे हैं।
जब भी बंटे, तब कमजोर हुए संघ प्रमुख ने देश की विविधता को भारत की ताकत बताया, लेकिन चेतावनी दी कि अलगाव की भावना देश को पतन की ओर ले जाती है। उन्होंने 1947 के विभाजन का उल्लेख करते हुए कहा कि जब समाज में दूरियां बढ़ती हैं, तो देश कमजोर होता है। उन्होंने जोर दिया कि भारत माता सर्वोपरि है और हमें अपनी विविध पहचानों को अक्षुण्ण रखते हुए एकजुट रहना होगा।
आंदोलन: समाधान या राजनीति का हथियार? आंदोलनों की दिशा पर सवाल उठाते हुए भागवत ने कहा कि यदि कोई आंदोलन समाज की समस्याओं के समाधान के लिए है, तो वह उचित है। लेकिन, यदि उसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति या विचारधारा के प्रति नफरत फैलाने के लिए किया जाता है, तो वह केवल राजनीति का औजार बनकर रह जाता है। उन्होंने ऐसे टकरावों से बचने की सलाह दी जिनका फायदा देश विरोधी ताकतें उठा सकती हैं।
संस्कृति का संरक्षण और संत रविदास की सीख अपने संबोधन में उन्होंने राज नारायण बसु और संत रविदास को याद किया। उन्होंने कहा कि संघ पिछले 100 वर्षों से भारतीय संस्कृति और स्वदेशी को पुनर्जीवित करने का कार्य कर रहा है। उन्होंने संत रविदास के विचारों को सामाजिक समरसता और कठिन समय में मनोबल बढ़ाने वाला बताया, जो आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक हैं।
युवाओं के लिए चेतावनी: नशा, ओटीटी और एआई नई पीढ़ी को लेकर चिंता जताते हुए भागवत ने तीन प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने को कहा:
शताब्दी वर्ष का भव्य आयोजन RSS की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी। इस साल शताब्दी वर्ष होने के कारण कार्यक्रम में विशेष उत्साह देखा गया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। संघ ने इस दिन शस्त्र पूजन कर अपनी परंपरा को दोहराया और देश को एक मजबूत समाज के निर्माण का संकल्प दिलाया।
*आन्दोलन करने वाला समाज का कोई समूह हो, शांति व सुव्यवस्था कायम रखने के लिए कार्यवाही करने वाला शासन-प्रशासन या राजनीतिक नेतागण हो, हमारी करनी के कारण किसी प्रकार की अनबन, द्वेष, त्वेष, मलाल या विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए, भावनाएं तीव्र होने पर भी कानून की मर्यादा में, भद्र… pic.twitter.com/QGHLNRqnsE
— RSS (@RSSorg) October 20, 2026
आगरा में NHM कर्मचारियों की हड़ताल: अस्पतालों में डॉक्टर नदारद, इलाज के लिए भटक रहे मरीज
सबको एक दिन मरना है ... उपदेश देते हुए पादरी पर गिरा भारी क्रॉस, LIVE हुआ दर्दनाक अंत
सैफई का यादव जेल जाए तो हंगामा, अब्दुल के लिए चुप्पी : ओवैसी ने अखिलेश पर साधा निशाना
देश को बांटने की कोशिश में जुटी हैं बाहरी ताकतें , RSS प्रमुख मोहन भागवत की चेतावनी
जीमेल चलाने की पुरानी आदत बदलिए, ये 10 जादुई ट्रिक्स रोजाना बचाएंगे आपका समय
रणजी ट्रॉफी में चिन्मय सुतार का सुपरसोनिक धमाका: नाबाद 400 रन ठोक रचा इतिहास
बिग बॉस 20: आशिफ और काजी के बीच घमासान, राशन टास्क में स्काउट ओपी ने तोड़ा घर का सबसे बड़ा नियम
क्लीन स्वीप के इरादे से आज मैदान में उतरेगी टीम इंडिया, जानें कब और कहां देखें मुकाबला
महतारी वंदन योजना: छत्तीसगढ़ की महिलाओं में जगी आत्मनिर्भरता की अलख, आर्थिक आजादी से बदल रही तस्वीर
दशहरा 2024: दिल्ली-NCR में सुरक्षा का कवच , तैनात 13,000 पुलिसकर्मी और चप्पे-चप्पे पर नजर