कानपुर में सरकारी दावों की पोल खोलती एक शर्मनाक घटना सामने आई है। आयुष्मान भारत योजना का कार्ड लेकर इलाज के लिए भटक रहे एक मजदूर को न केवल अस्पतालों ने धक्के दिए, बल्कि एक डॉक्टर ने तो हद ही पार करते हुए यह तक कह दिया कि जाओ, मोदी से ही इलाज करा लो।
पांच अस्पतालों के चक्कर, फिर भी नहीं मिला इलाज चौबेपुर निवासी शशिकांत को सितंबर में गंभीर बुखार हुआ। वह आयुष्मान कार्ड लेकर एक के बाद एक पांच अस्पतालों में गए। कई अस्पतालों की दीवारों पर बड़े-बड़े बोर्ड लगे थे कि यहाँ आयुष्मान कार्ड से इलाज होता है, लेकिन जब शशिकांत और उनके परिजन अंदर पहुंचे, तो हर जगह उन्हें कोरी निराशा ही हाथ लगी।
डॉक्टर की बदसलूकी और तंज पीड़ित की पत्नी ने लखनपुर हॉस्पिटल के डॉक्टर बीके सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि जब उन्होंने इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड दिखाया, तो डॉक्टर भड़क गए। डॉक्टर ने तल्ख लहजे में कहा, मोदी से कार्ड बनवाया है तो उन्हीं से इलाज कराओ, यहां इलाज कराना है तो नकद पैसे लाओ। इस अपमानजनक बर्ताव के बाद परिजन पूरी तरह टूट गए।
कर्ज के बोझ तले दबा गरीब परिवार अस्पतालों द्वारा आयुष्मान कार्ड को स्वीकार न करने के कारण शशिकांत की जान बचाने के लिए उनके परिजनों को भारी कर्ज लेना पड़ा। अब तक इलाज में चार लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। शशिकांत की पत्नी का कहना है कि अब घर में बच्चों की पढ़ाई के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं। एक मजदूर के लिए यह कर्ज चुकाना किसी पहाड़ तोड़ने जैसा है।
मुख्यमंत्री से गुहार, स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल पीड़ित परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले की शिकायत की है। शिकायत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) तक पहुंच चुकी है, जो मामले की जांच का दावा कर रहे हैं। हालांकि, सवाल यह है कि यदि अस्पताल आयुष्मान कार्ड से इलाज ही नहीं करना चाहते, तो उन्हें इस योजना के तहत सूचीबद्ध (empanelled) क्यों किया गया है?
योजना पर गहराते सवाल आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का दावा किया जाता है। लेकिन कानपुर का यह मामला साबित करता है कि जमीनी हकीकत सरकारी दावों से कोसों दूर है। सरकारी पोर्टल पर भले ही कार्ड की लिमिट 5 लाख रुपये दिख रही हो, लेकिन निजी अस्पतालों की मनमानी के आगे गरीब मरीज आज भी इलाज के लिए कर्ज लेने को मजबूर हैं।
*कानपुर में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज न मिलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पांच अस्पतालों ने आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं किया। वहीं, एक डॉक्टर पर आयुष्मान कार्ड देखते ही भड़कने और मरीज से कथित तौर पर “मोदी से जाकर इलाज कराओ” कहने का आरोप है।#kanpur#Ayushmancard#viralpic.twitter.com/rdTLh4scJo
— NavBharat Live (@TheNavbharatliv) October 19, 2026
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