यवतमाल में गरजे एकनाथ शिंदे: शिक्षकों की पुरानी पेंशन और लंबित अनुदान पर दिया बड़ा भरोसा
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यवतमाल: अमरावती विभागीय शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। यवतमाल में आयोजित एक विशाल जनसभा में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने महायुति के उम्मीदवार किरण सरनाईक के समर्थन में दम भरा और शिक्षकों की वर्षों पुरानी समस्याओं को हल करने का वादा किया।

पेंशन और वेतन अनुदान पर मुख्य फोकस

सभा के दौरान सबसे अधिक चर्चा 1 नवंबर 2005 से पहले सेवा में आए पात्र शिक्षकों और कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना को लेकर हुई। इसके अलावा, रुकी हुई अनुदान की किस्तें, वेतन अनुदान और शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को सुचारू रखने जैसे गंभीर मुद्दों पर उपमुख्यमंत्री ने विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि सरकार इन लंबित मांगों को प्राथमिकता पर हल करेगी।

मराठी स्कूलों के अस्तित्व की चिंता

शिक्षण क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने मराठी स्कूलों के बंद होने की आशंका और घटती विद्यार्थी संख्या पर चिंता जताई। इस पर एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया कि मराठी स्कूलों के अस्तित्व को बचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक कार्यों के लिए राज्य सरकार निधि की कमी आड़े नहीं आने देगी और शिक्षक-कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस नीति अपनाई जाएगी।

किरण सरनाईक के लिए मांगा समर्थन

उपमुख्यमंत्री ने महायुति के उम्मीदवार किरण सरनाईक की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा शिक्षकों के हक के लिए लड़ाई लड़ी है। सरनाईक ने अपने संबोधन में 56 तालुकों में किए गए कार्यों का ब्योरा दिया और विश्वास दिलाया कि वे भविष्य में भी पूरी ईमानदारी से शिक्षकों के हितों के लिए काम करेंगे। मंच से सभी नेताओं ने एक स्वर में 23 तारीख को किरण सरनाईक को पसंती क्रमांक एक देकर भारी मतों से जिताने की अपील की।

दिग्गजों की मौजूदगी ने बढ़ाया चुनावी उत्साह

इस कार्यक्रम में मंत्री संजय राठोड, मंत्री अशोक उईके, सांसद संजय देशमुख, विधायक भावना गवली, विधायक राजू तोडसाम सहित महायुति के कई बड़े नेता और स्थानीय पदाधिकारी मौजूद रहे। सभा के बाद उपमुख्यमंत्री ने स्थानीय नवरात्रोत्सव मंडल में जाकर आई जगदंबे का आशीर्वाद लिया।

चुनावी वादों से आगे क्या?

अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का यह चुनाव केवल सत्ता का प्रदर्शन नहीं, बल्कि शिक्षकों के भविष्य का सवाल है। पुरानी पेंशन और लंबित अनुदानों जैसे वादे हर चुनाव में गूंजते हैं, लेकिन इस बार शिक्षकों की नजर इन आश्वासनों के जमीनी क्रियान्वयन पर टिकी है। क्या महायुति के ये वादे चुनावी नतीजों में बदल पाएंगे, यह 27 तारीख को स्पष्ट होगा।

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