वोटर लिस्ट में डबल वोट का खेल: SIR पर वायरल वीडियो ने छेड़ी नई बहस
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वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। एक तरफ विपक्षी दल इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं जो चुनाव आयोग की इस कवायद को सही ठहरा रहे हैं। इन वीडियो में लोग खुद स्वीकार कर रहे हैं कि उनके नाम एक से ज्यादा राज्यों की वोटर लिस्ट में दर्ज थे।

कांग्रेस कार्यकर्ता ने माना— SIR सही है सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में कांग्रेस का झंडा लिए एक शख्स, जिसकी पहचान मोहम्मद सैफ के रूप में हुई है, SIR का समर्थन करता दिख रहा है। सैफ ने खुलासा किया कि उसके वोट बिहार और दिल्ली, दोनों जगहों पर बने हुए थे। उसने खुद माना कि SIR प्रक्रिया के तहत उसने दिल्ली को अपना स्थायी पता चुना और बिहार से अपना नाम कटवा लिया। उसने स्पष्ट कहा, एक जगह नाम होना चाहिए, SIR सही है।

बीजेपी का कांग्रेस पर निशाना इस वीडियो के वायरल होते ही बीजेपी ने कांग्रेस को निशाने पर ले लिया है। बीजेपी प्रवक्ता शिवम त्यागी ने वीडियो शेयर करते हुए तंज कसा कि कांग्रेस के कार्यकर्ता का दोहरा वोट कटने के बाद वे विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। भाजपा नेताओं का तर्क है कि SIR के जरिए फर्जी वोटिंग और दोहरी नागरिकता जैसी वोटर लिस्ट की खामियों को दूर किया जा रहा है, जिसका विरोध करना गलत है।

चार वोटर कार्ड वाला शख्स भी आया सामने इसी कड़ी में एक और चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में एक शख्स दावा कर रहा है कि उसके पास चार अलग-अलग जगहों (देहरादून, जयपुर, दिल्ली आदि) के वोटर कार्ड थे। उसने बताया कि SIR के दौरान उसके तीन वोटर कार्ड रद्द कर दिए गए और अब सिर्फ एक बचा है। उसने यह भी दावा किया कि पहले उसके पूरे परिवार के पास भी इतने ही वोटर कार्ड थे।

ज्ञानेश कुमार की कार्रवाई पर चर्चा एक अन्य वीडियो में भी एक शख्स दो वोटर कार्ड लेकर कैमरे के सामने आता है और कहता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उसका एक नाम काट दिया है। वह चुनौती देते हुए पूछता है, क्या एक नाम कटना नहीं चाहिए? उसने इसे सिस्टम की सफाई के लिए जरूरी कदम बताया।

क्या है SIR का उद्देश्य? SIR (Special Intensive Revision) का मुख्य लक्ष्य वोटर लिस्ट को अपडेट करना है। इसका उद्देश्य उन नामों को हटाना है जो एक से अधिक जगहों पर दर्ज हैं, या फिर उन लोगों के नाम हटाना जो अब उस क्षेत्र में नहीं रहते। हालांकि, विपक्षी दल इसे वोट बैंक को प्रभावित करने की एक चाल बता रहे हैं, लेकिन वायरल हो रहे ये वीडियो इस प्रक्रिया पर नई बहस छेड़ रहे हैं।

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