देहरादून वाली रहस्यमयी महिला कौन? राहुल गांधी के बयान से सियासी गलियारों में हलचल
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनावी अनियमितताओं के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इंडिया गठबंधन की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ देहरादून में छिपी एक महिला का जिक्र कर नई बहस छेड़ दी है।

कौन है वह महिला? राहुल गांधी ने किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका इशारा चुनाव आयोग की महानिदेशक (आईटी) सीमा खन्ना की ओर हो सकता है।

क्यों निशाने पर हैं सीमा खन्ना? सीमा खन्ना चुनाव आयोग के आईटी विभाग की प्रमुख हैं और आयोग की डिजिटल व्यवस्था संभालती हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने मतदाता सूची से जुड़े सॉफ्टवेयर के संचालन और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (EROs) की शक्तियों को लेकर विवादित निर्णय लिए। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने तो हाल ही में उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग तक की है।

सोशल मीडिया पर भी सुगबुगाहट कांग्रेस की मीडिया समन्वयक हरमीत कौर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए सीमा खन्ना का नाम उछालकर इन कयासों को और हवा दे दी है। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या सीमा खन्ना देहरादून में छिपी हैं? और उन्हें कौन बचा रहा है?

चुनाव आयोग के अंदर भी उठे थे सवाल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने भी सीमा खन्ना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। मुख्य विवाद इस बात पर था कि क्या उन्हें EROs की सॉफ्टवेयर तक पहुंच सीमित करने और उनके वैधानिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने का कानूनी अधिकार था।

राहुल गांधी का संकल्प, न्याय होकर रहेगा प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई सिर्फ राजनीतिक दलों की नहीं, बल्कि देश की जनता की है। उन्होंने कहा कि मोदी-शाह और ज्ञानेश कुमार समेत जो भी लोग संविधान और चुनावी प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने के जिम्मेदार हैं, उन्हें न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाएगा।

विपक्ष का मिशन लोकतंत्र राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सरकार ने जंतर-मंतर जैसे लोकतांत्रिक मंचों का उपयोग सीमित कर दिया है, जिसे इंडिया गठबंधन चुनौती देगा। उन्होंने साफ किया कि चुनावी व्यवस्था में जो तोड़-फोड़ की गई है, उसे बहाल करने के लिए वे अंतिम क्षण तक संघर्ष जारी रखेंगे। फिलहाल, देहरादून में छिपी महिला का प्रकरण इस पूरे विवाद का सबसे रहस्यमयी हिस्सा बन गया है।

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