क्या बजट में खत्म होगा LTCG टैक्स? वित्त मंत्री के बयान से बाजार में उम्मीद की लहर
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भारतीय शेयर बाजार में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स को लेकर बहस छिड़ गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक हालिया बयान में कहा है कि सरकार आगामी बजट से पहले इस टैक्स को लेकर निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के सुझाव सुनने के लिए तैयार है। इस बयान के बाद निवेशकों में उम्मीद जगी है कि सरकार इस टैक्स को लेकर कोई राहत दे सकती है।

क्या है LTCG टैक्स?

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) वह टैक्स है जो शेयरों या इक्विटी म्यूचुअल फंड को 12 महीने से अधिक समय तक रखने के बाद बेचने पर हुए मुनाफे पर लगता है। वर्तमान नियमों के तहत, एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक का मुनाफा टैक्स-फ्री है। इससे ऊपर के मुनाफे पर 12.5% की दर से टैक्स वसूला जाता है।

टैक्स हटने से निवेशकों को होगा कितना फायदा?

अगर सरकार LTCG टैक्स को पूरी तरह खत्म करती है, तो निवेशकों के हाथ में आने वाला वास्तविक रिटर्न बढ़ जाएगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी निवेशक को 5 लाख रुपये का मुनाफा होता है, तो वर्तमान नियमों के तहत उसे करीब 46,875 रुपये का टैक्स देना पड़ता है। टैक्स हटने की स्थिति में निवेशक का यह पूरा पैसा बचेगा, जिससे बाजार में दीर्घकालिक निवेश को और प्रोत्साहन मिलेगा।

राजस्व का गणित: सरकार के लिए क्यों है यह बड़ी चुनौती?

सरकार के लिए LTCG टैक्स राजस्व का एक बड़ा स्रोत है। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 (अनुमानित) के दौरान सरकार को इस टैक्स से कुल 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमाई होने की संभावना है। इतनी बड़ी राशि को छोड़ना सरकार के लिए राजकोषीय घाटे को देखते हुए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

STT और LTCG का दोहरा बोझ

निवेशक अक्सर यह तर्क देते हैं कि शेयर खरीदते और बेचते समय सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पहले ही लिया जाता है, और फिर मुनाफे पर LTCG टैक्स का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि STT लेनदेन पर आधारित है, जबकि LTCG मुनाफे पर। फिलहाल, वित्त मंत्री ने केवल सुझाव सुनने की बात कही है, इसे टैक्स खत्म करने की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जाना चाहिए।

क्या है आगे की राह?

वित्त मंत्री का बयान सिर्फ एक संकेत है कि सरकार उद्योग जगत की मांग के प्रति संवेदनशील है। हालांकि, बजट से पहले सुझावों पर विचार करना सरकार की एक सामान्य प्रक्रिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार निवेशकों को राहत देगी या फिर टैक्स ढांचे में किसी बदलाव के बजाय अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा। फिलहाल, निवेशकों को बजट में होने वाली औपचारिक घोषणाओं का इंतजार करना चाहिए।

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