रूस-पाकिस्तान की बढ़ती करीबियां: क्या पुतिन के मंत्री का इस्लामाबाद दौरा भारत के लिए खतरे की घंटी है?
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इस्लामाबाद: रूस और पाकिस्तान के बीच बदलते रणनीतिक समीकरण दक्षिण एशिया की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गए हैं। रूस के गृह मंत्री व्लादिमीर कोलोकोल्त्सेव का 12 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ चार दिवसीय पाकिस्तान दौरा इसी ओर इशारा कर रहा है। यह इतिहास में पहला मौका है जब रूस के किसी गृह मंत्री ने पाकिस्तान की धरती पर कदम रखा है।

दौरे का मकसद और अहमियत रूसी गृह मंत्री का यह दौरा पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के आमंत्रण पर हो रहा है। इस्लामाबाद पहुंचने पर उनका स्वागत गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने किया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस यात्रा का मुख्य एजेंडा दोनों देशों के बीच कानून व्यवस्था, पुलिस सहयोग और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर चर्चा करना है। हालांकि, अभी तक किसी बड़े द्विपक्षीय समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

क्यों करीब आ रहे हैं रूस और पाकिस्तान? पिछले कुछ समय से रूस और पाकिस्तान के बीच व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की कोशिशें तेज हुई हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहे रूस को अपने ऊर्जा कारोबार के लिए नए बाजारों की तलाश है। वहीं, पाकिस्तान अपनी चरमराई अर्थव्यवस्था और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस के साथ आर्थिक रिश्ते मजबूत करना चाहता है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन और उनके उप प्रधानमंत्री पहले ही पाकिस्तान को एक महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में देख चुके हैं।

भारत के लिए क्या है चुनौती? भारत के लिए रूस एक दशकों पुराना और भरोसेमंद रक्षा साझेदार रहा है। ऐसे में मास्को और इस्लामाबाद की बढ़ती नजदीकियां नई दिल्ली के लिए रणनीतिक चिंता का सबब बन सकती हैं। जानकार मानते हैं कि क्षेत्रीय समीकरणों में यह बदलाव भारत के लिए सतर्क रहने का संकेत है। हालांकि, केवल गृह मंत्री के इस दौरे को भारत-रूस संबंधों में दरार के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी।

क्या पुराने रिश्तों पर पड़ेगा असर? भारत और रूस के संबंध केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के एक बड़े दायरे में फैले हुए हैं। फिलहाल इस बात के ठोस संकेत नहीं हैं कि मास्को भारत के साथ अपने संबंधों की कीमत पर पाकिस्तान को प्राथमिकता देगा। इस दौरे का भविष्य और प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले समय में दोनों देश किन समझौतों को धरातल पर उतारते हैं। फिलहाल, नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए है।

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