दादी के निधन पर फोन देने से मना, हिरासत से छूटते ही अभिजीत दिपके ने खोला दिल्ली पुलिस का काला चिट्ठा
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नागपुर एयरपोर्ट पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। हिरासत से रिहा होते ही दिपके ने पुलिस पर अमानवीय व्यवहार और बुनियादी मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाया है।

दादी के निधन की खबर और फोन के लिए मिन्नतें

दिपके का आरोप है कि हिरासत के दौरान पुलिस ने उन्हें उनकी दादी के निधन की सूचना दी। उन्होंने पुलिस से केवल दो मिनट के लिए अपना फोन मांगा ताकि वे गांव में अपने चचेरे भाई से बात कर सकें। दिपके का कहना है कि उन्होंने पुलिस से साफ कहा था कि उन्हें नंबर याद नहीं है, फोन में ही सेव है, लेकिन पुलिस ने फोन देने से साफ इनकार कर दिया।

वकील से संपर्क करने पर भी पाबंदी

दिपके ने यह भी खुलासा किया कि कानूनी रूप से अपने वकील से बात करना उनका अधिकार था, लेकिन पुलिस ने इस अधिकार को भी दरकिनार कर दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उन्हें किसी भी तरह के कानूनी परामर्श या बाहरी संपर्क से पूरी तरह काट दिया था।

रात के अंधेरे में परिजनों को सदमा देने का आरोप

दिपके के अनुसार, पुलिस ने रात के 3:30 बजे उन पर दबाव बनाया कि वे अपने माता-पिता को फोन करके अपनी गिरफ्तारी की सूचना दें। दिपके ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि जब उन्हें दिन में ही हिरासत में ले लिया गया था, तो उनके परिवार को सूचित क्यों नहीं किया गया? उन्होंने तड़के माता-पिता को फोन करवाकर उन्हें डराने की साजिश करार दिया और पुलिस को वर्दी में गुंडे तक कह डाला।

पुलिस का अपना पक्ष: हमने हर मदद की पेशकश की थी

दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस की डीसीपी नेहा यादव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि पुलिस ने पूरी संवेदनशीलता के साथ दिपके को दादी के निधन की सूचना दी थी। डीसीपी के अनुसार, पुलिस ने उन्हें फोन करने, फ्लाइट की व्यवस्था करने और माता-पिता से बात कराने की पेशकश की थी, जिसे दिपके ने खुद ही ठुकरा दिया।

कानून और सुरक्षा का हवाला

दिल्ली पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि दिपके और उनके संगठन का पिछला रिकॉर्ड खराब रहा है। पिछली बार प्रदर्शन के दौरान आगजनी और पत्थरबाजी हुई थी, जिसके चलते इस बार अनुमति नहीं दी गई थी। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 133 BNSS लागू की गई थी, जिसके तहत किसी भी तरह के जमावड़े पर प्रतिबंध था।

तानाशाही के खिलाफ जंग जारी रहेगी

आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच, अभिजीत दिपके ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी सरकारी दबाव या बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे। उन्होंने ऐलान किया है कि वे पुलिस और सरकार की कथित तानाशाही के खिलाफ सड़क पर अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

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