विश्व बैंक का बड़ा फैसला: दक्षिण एशिया से बाहर हुआ पाकिस्तान, भारत से तुलना का अध्याय खत्म?
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न्यूज डेस्क: विश्व बैंक के एक प्रशासनिक फैसले ने पाकिस्तान की वैश्विक और क्षेत्रीय पहचान पर नई बहस छेड़ दी है। बैंक ने अपने क्षेत्रीय वर्गीकरण में बड़ा बदलाव करते हुए पाकिस्तान और अफगानिस्तान को दक्षिण एशिया समूह से बाहर कर दिया है। अब इन्हें MENAAP (मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, अफगानिस्तान और पाकिस्तान) समूह में जगह दी गई है।

क्या है नया वर्गीकरण?

विश्व बैंक की नई व्यवस्था के तहत 1 जुलाई 2025 से दक्षिण एशिया समूह में अब केवल भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और मालदीव शामिल रहेंगे। पाकिस्तान और अफगानिस्तान को आधिकारिक रूप से इस क्षेत्रीय सूची से हटाकर MENAAP समूह के साथ जोड़ दिया गया है। यह बदलाव विश्व बैंक की वेबसाइट और दिसंबर 2025 की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है।

क्यों शुरू हुआ विवाद?

पाकिस्तानी पत्रकार शहबाज राणा ने इस बदलाव को लेकर बड़ा दावा किया है। उनका मानना है कि यह फैसला भारत और पाकिस्तान के बीच व्याप्त तनाव और प्रशासनिक कठिनाइयों के कारण लिया गया है। चर्चा यह भी है कि विश्व बैंक का क्षेत्रीय कार्यालय नई दिल्ली में होने के कारण पाकिस्तानी अधिकारियों को वीजा और अन्य यात्रा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता था, जिसे देखते हुए यह कदम उठाया गया।

क्या भारत से तुलना का अंत हो गया?

लंबे समय से दक्षिण एशियाई देशों की आर्थिक प्रगति और गरीबी के आंकड़ों की तुलना एक साथ की जाती थी। अब पाकिस्तान के अलग समूह में जाने से इन देशों के बीच सीधा आर्थिक मुकाबला या तुलना करना तकनीकी रूप से मुश्किल हो जाएगा। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक पुनर्वर्गीकरण है, इसे सीधे तौर पर किसी देश की जीत या दंड के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

क्या पाकिस्तान अब सऊदी अरब और यूएई के बराबर है?

सोचिए अगर पाकिस्तान को MENAAP समूह में डाल दिया गया, तो क्या वह सऊदी अरब और यूएई के स्तर पर आ गया? जवाब है—बिल्कुल नहीं। विश्व बैंक का यह वर्गीकरण केवल डेटा प्रबंधन के लिए है, न कि आर्थिक समानता का कोई प्रमाणपत्र। इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं और प्रति व्यक्ति आय में जमीन-आसमान का अंतर है। यह समूह केवल भौगोलिक और सांख्यिकीय गणनाओं को सरल बनाने का एक तरीका है।

आंकड़ों के लिए बड़ी चुनौती

इस बदलाव का सबसे बड़ा असर गरीबी के आंकड़ों पर पड़ेगा। विश्व बैंक ने स्वीकार किया है कि पाकिस्तान के पास गरीबी से संबंधित ताजा डेटा की भारी कमी है। पाकिस्तान के आंकड़े 2018 के पुराने सर्वेक्षणों पर आधारित हैं। ऐसे में नए MENAAP समूह में शामिल होने के बाद, पाकिस्तान के आर्थिक मानकों का सटीक आकलन करना विश्व बैंक के लिए भी एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

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