पहले टिकट तो लाएं, फिर चुनौती दें : अयोध्या सीट पर सपा नेता ने CM योगी को घेरा
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उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। अयोध्या सीट को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच छिड़ी जुबानी जंग अब और तीखी हो गई है। हाल ही में सपा नेता और संभावित उम्मीदवार पवन पांडेय ने सीएम योगी पर तीखा हमला बोला है।

क्या योगी जी का टिकट पक्का है?

मीडिया से बातचीत करते हुए पवन पांडेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुनौती पर तंज कसा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या योगी आदित्यनाथ का अपना टिकट कन्फर्म है? पांडेय ने कहा, योगी जी चुनौती देने से पहले यह बताएं कि क्या उनकी पार्टी ने उन्हें अयोध्या से टिकट देने का फैसला कर लिया है? अभी तो पार्टी अध्यक्ष ने भी इस पर चुप्पी साध रखी है।

2022 का जिक्र कर कसा तंज

सपा नेता ने 2022 के विधानसभा चुनावों की याद दिलाते हुए कहा कि पिछली बार भी सीएम योगी ने अयोध्या में मिठाई, बैग और मोबाइल तक बंटवाए थे, लेकिन अंत में उनका टिकट गोरखपुर से आया। उन्होंने आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ अभी खुद टिकट के संकट से जूझ रहे हैं और उन्हें यह भी नहीं पता कि पार्टी उन्हें कहां से मैदान में उतारेगी।

अयोध्या में विकास नहीं, लूट हुई है

पवन पांडेय ने योगी सरकार पर अयोध्या के विकास को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि अयोध्या में विकास के नाम पर केवल लूट हुई है। व्यापारियों की दुकानें तोड़ी गईं, लेकिन उन्हें पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला। वहीं, एयरपोर्ट के नाम पर किसानों की जमीनें हड़प ली गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में व्यापार, किसानी और रोजगार पर डाका डाला गया है।

आमने-सामने की लड़ाई की चुनौती

इस पूरे विवाद की शुरुआत अखिलेश यादव की उस सोशल मीडिया पोस्ट से हुई, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भाजपा का कोई भी नेता अयोध्या से चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं कर रहा है। इसके जवाब में सीएम योगी ने एक जनसभा में अखिलेश की चुनौती स्वीकार करते हुए कहा था कि वे अखिलेश को अयोध्या से नामांकन भरने का निमंत्रण देते हैं, ताकि आमने-सामने की लड़ाई हो सके।

सपा का वीआईपी कल्चर हटाने का वादा

सपा नेता ने स्पष्ट किया कि यदि 2027 में समाजवादी पार्टी की सत्ता में वापसी होती है, तो अयोध्या में चल रहे वीआईपी कल्चर को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। अब देखने वाली बात यह है कि क्या यह जुबानी जंग वास्तव में चुनावी मैदान में आमने-सामने के मुकाबले में बदलती है या यह केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगी।

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